पैरा ओलंपिक में भारत के खाते में आए कई पदक, जानें किसने की शुरुआत

भारत की भाविना पटेल ने टोक्यो में पैरालंपिक गेम्स में इतिहास रच रजत पदक अपने नाम कर लिया है। अपने पहले ही पैरालंपिक में भाविना रजत पदक जीतने में कामयाब रही और इसके साथ ही भारत की ओर से टेबल टेनिस में पैरालंपिक में मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गई हैं।

19 मिनट तक चले मुकाबले में पटेल वर्ल्ड नंबर वन यिंग को कड़ी टक्कर देने में कामयाब नहीं हो पाई जिसके कारण भारत की झोली में स्वर्ण पदक नहीं आ सका। बावजूद इसके भाविना का टोक्यो पैरालंपिक में सफर बेहद ही शानदार रहा और अपने प्रदर्शन से उन्होंने सभी को प्रभावित किया।

वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर 12 पर मौजूद भाविना पटेल बड़े-बड़े खिलाड़ियों को मात देकर आगे बढ़ीं। प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्होंने नंबर-8 खिलाड़ी को मात दी, क्वार्टर फाइनल में उन्होंने रियो पैरालंपिक की गोल्ड मेडलिस्ट और नंबर-2 खिलाड़ी को मात दिया तो वहीं सेमीफाइनल में चीन की स्टार खिलाड़ी और वर्ल्ड नंबर-3 को मात देकर भाविना ने भारत के लिए रजत पक्का किया था। प्रधानमंत्री ने भाविना को रजत पदक जीतने पर बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि “उनकी उपलब्धियों ने पूरे देश को प्रेरित किया है।” ट्वीट कर खिलाड़ी को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा “उल्लेखनीय भावना पटेल ने रचा इतिहास! वह अपने घर एक ऐतिहासिक रजत पदक ला रहीं हैं।

उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई। उनकी जीवन यात्रा प्रेरित करने वाली है और ज्यादा युवाओं को खेलों की ओर आकर्षित करेगी।” उनकी जीत पर भारतीय पैरालंपिक समिति की अध्यक्ष दीपा मलिक ने कहा “भाविना पटेल के रजत पदक ने इतिहास रच दिया है और वो भी राष्ट्रीय खेल दिवस के दिन। मेरे लिए इससे बड़ी खुशी की बात क्या होगी कि एक महिला ख़िलाड़ी ने मेडल का खाता खोला है और वह महिला खिलाड़ी भी ऐसी, जो व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती है।”

इस मौके पर खिलाड़ी के पिता हसमुखभाई पटेल ने बताया कि “उसने देश का नाम रोशन किया। वह गोल्ड मेडल नहीं लेकर आईं लेकिन हम रजत पदक से भी खुश हैं। वापस आने पर हम उसका भव्य स्वागत करेंगे।”

इन सब के साथ अपनी जीत पर भाविना पटेल का कहना है कि “मैं बहुत खुश हूं कि पैरालंपिक में पहली बार पैरा टेबल टेनिस में भारतीय महिला ने पदक जीतकर इतिहास रचा। मैं कोच को धन्यवाद देती हूं। मेरे रिश्तेदारों ने बहुत प्रेरित किया।

मेरे जितने भी चाहने वाले हैं उन्हें और सभी देशवासियों को यह मेडल समर्पित करना चाहती हूं। उनके सहयोग के बिना मैं यहां नहीं पहुंच सकती थी।”

बता दें कि भाविना 12 वर्ष की उम्र में पोलियो का शिकार हो गई थी।

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