हर साल 10 नवंबर को विश्व टीकाकरण दिवस हमें याद दिलाता है कि टीके न केवल बच्चों बल्कि हर उम्र के लोगों की रक्षा करते हैं। भारत में जहाँ बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम ने बड़ी प्रगति की है, वहीं वयस्क टीकाकरण अभी भी पीछे है।
तेजी से बढ़ती उम्रदराज़ आबादी, पुरानी बीमारियों और संक्रमण के बढ़ते ख़तरों के बीच, अब समय है कि टीकाकरण को “लाइफ-कोर्स वैक्सीनेशन” यानी जीवनभर की सुरक्षा के रूप में देखा जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, वयस्क टीके जैसे इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल, एचपीवी, जोस्टर और टीडी/टीडैप बूस्टर न केवल बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि अस्पताल में भर्ती और स्वास्थ्य व्यय को भी कम करते हैं।
भारत में वयस्क टीकाकरण के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश सीमित हैं। वर्तमान में गर्भवती महिलाओं के लिए टिटनस को छोड़कर कोई अनिवार्य वयस्क टीका नहीं है। जागरूकता की कमी, सुविधाओं की अनुपलब्धता और हिचकिचाहट इसके प्रमुख कारण हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वयस्क टीकाकरण को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में जोड़ा जाए और जन-जागरूकता बढ़ाई जाए, तो यह भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था-दोनों को सशक्त बना सकता है।
इस विश्व टीकाकरण दिवस 2025, आइए यह संकल्प लें – टीकाकरण सिर्फ बचपन की नहीं, पूरे जीवन की सुरक्षा है।
