भारत

मोटर वाहन अधिनियम नही,ट्रैफिक पुलिस मनमानी अधिनियम कहिए जनाब!

पहले एक कार्ययोजना पर काम करें,जागरूकता लाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के दिशा में काम करें,उसके बाद आपके तय नियम और कानून का पालन न हो तो बेशक जुर्माना लगाएं,जेल में डाल दें।

विशेष

इसरो प्रमुख से ज्यादा कौन समझेगा चंद्रयान 2 का मोल

चंद्रयान 2 से संपर्क टूटा है हौसला नही। हम फिर प्रयास करेंगे, चांद पर तो पहुंच ही गए बस देख न सके। कोई बात नही एक छलांग और लगेगी, दुगनी ऊर्जा से लगेगी,वैज्ञानिकों के ज्ञान और विज्ञान पर पूरा भरोसा है। पूरा देश आपका,आपके प्रयासों का,आपकी अनवरत मेहनत और बिन सोए गुजारी रातों के लिए आपका शुक्रगुजार है।

राजनीति

कश्मीर को लेकर सुप्रीम फैसला,धारा 370 खत्म, दो भागों में बंटा कश्मीर

यह व्यवस्था ठीक वैसी ही होगी जैसे दिल्ली पर लागू होती है।आसान शब्दों में इसे समझें तो अब जम्मू कश्मीर की व्यवस्था अब बहुत हद तक दिल्ली की तरह होगी जहां अधिकतर शक्तियां केंद्र के प्रतिनिधि राज्यपाल या उप राज्यपाल के पास होंगी।

विशेष

तय मानिए संसद सत्र खत्म होते ही कश्मीर में यह होना है!

कश्मीर इन दिनों सुर्खियों में है। सेना की बढ़ती आवाजाही ने राज्य के माहौल को गर्म कर दिया है। विपक्ष,कश्मीरी नेताओं,मीडिया सहित पूरे देश के मन मे एक ही सवाल है कि कश्मीर में इतनी बड़ी संख्या में सेना की तैनाती क्यों? क्या 35A और 370 को लेकर केंद्र सरकार कोई बड़ा फैसला लेने जा […]

राजनीति

बंगाल में दिखा राजनीति का धर्म नहीं, बस धर्म की राजनीति

राजनीति में सबसे बड़ी बात होती है जिससे समाज और देश का भला हो सकता है वह है राज करने की नीति और उसके धर्म का पालन लेकिन आज के समय में न नीति है, न नियत है, न मुद्दे हैं. देश लोकतंत्र के त्योहार का उत्साह मना रहा है. बड़े छोटे दलों ने लगभग […]

विशेष

औसत या डिग्री से सफलता मिलती तो देश को सचिन और दुनिया को बिल गेट्स न मिलते, पढ़ें कुछ खास

मई और जून का महीना विद्यार्थियों, शिक्षकों और परिवार से जुड़े लोगों के लिए काफी अहम् महीने होते है. यह वह महीने हैं जब बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे घोषित किए जाते हैं. इन दिनों में कहीं ख़ुशी कहीं गम का माहौल होता है. जो बच्चे अच्छा कर जाते हैं वह परिवार,विद्यालय,कोचिंग,रिश्तेदारी,मोहल्ला और समाज के साथ […]

राजनीति

सोशल मीडिया पर मिल रही सलाह, किसे और क्यों दल बनायें उम्मीदवार

राजनीति में इति या अंत नाम कि शब्दावली का कोई प्रयोग नहीं है। हिंदी से लेकर ऑक्सफ़ोर्ड तक कि डिक्शनरी आप पलट लीजिए लेकिन उसमें कोई ऐसा शब्द नही जो भारतीय लोकतंत्र को समझा सके। ऐसा इसलिए नही कि डिक्शनरी लिखने वालों की जानकारी कम है बल्कि ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां लोकतंत्र का मतलब […]

राजनीति विशेष

बीजेपी में जाति,धर्म और गठबंधन से टूटी टिकट की आस, जनता के लिए भी क्या यही होंगे खास?

लोकसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है। आज की व्यवस्था में बदलाव होगा या यही व्यवस्था पांच साल और चलेगी यह तो आने वाले चुनाव परिणाम बताएंगे। हालांकि इन सब के बीच जिस तरह जाति, धर्म और दल देखकर वोट देने की परंपरा का निर्वाहन करने की तैयारी दिख रही है उससे तो यही स्पष्ट […]