राजनीति

क्यों अचानक सोशल मीडिया से रूठ गए पीएम मोदी?

सोशल मीडिया आज हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है। आज हम दोस्तों के बीच हों, परिवार के साथ हों या ऑफिस में हमारा ध्यान इसी पर होता है। जैसे क्या ट्रेंड्स चल रहा, किस मुद्दे पर लोग लिख रहे, क्या बातें चल रही मतलब चापलूसी, कानाफूसी से लेकर चमचागिरी तक आज हम हर बात […]

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राजनीति विशेष

प्रशांत और कन्हैया की जोड़ी क्या दोहराएगी बिहार का इतिहास?

बिहार को राजनीति का रिसर्च सेंटर कहा जाता है। जब भी बात राजनीति में बदलाव की आई हो, जब भी जात-धर्म, मंडल-कमंडल की राजनीति सुगबुगाहट हुई। बिहार अगुआ रहा। जहां चाणक्य ने चंद्रगुप्त को सबसे बड़ी सत्ता सौंप दी थी। अब क्या वही बिहार एक और बदलाव का वाहक बनेगा? क्या दिल्ली की जीत का […]

राजनीति विशेष

दिल्ली चुनाव के नतीजों के बाद क्या होगा?

देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी संग्राम खत्म हो चुका है। तीखी बयानबाजी, अलग-अलग मुद्दे, भाषण से लेकर राशन तक कि लड़ाई पर जनता ने अपनी मुहर लगा दी है। एग्जिट पोल भी आ चुके हैं। मुद्दे, रुझान सब सामने हैं और अब बस बेशब्री से नतीजों का इंतजार है। कहीं किसी खेमे में एग्जिट […]

राजनीति

राजनीति की काल कोठरी में केजरीवाल बनना आसान है न मोदी

जितना भारतीयों का सम्मान पूरी दुनिया मे है उतना ही बिहारी लोगों का भारत के अन्य राज्यों में, मसलन गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक इत्यादि में है।

राजनीति

बीजेपी को छोड़िए शिवसेना की सोचिए…

यह शिवसेना उन्ही बालासाहेब की हिंदूवादी आधारभूत संरचना पर खड़ी थी जहां कट्टर हिंदूवाद की छवि थी, राष्ट्रवाद की छाप थी, पाकिस्तान का मुद्दा था

राजनीति

कश्मीर को लेकर सुप्रीम फैसला,धारा 370 खत्म, दो भागों में बंटा कश्मीर

यह व्यवस्था ठीक वैसी ही होगी जैसे दिल्ली पर लागू होती है।आसान शब्दों में इसे समझें तो अब जम्मू कश्मीर की व्यवस्था अब बहुत हद तक दिल्ली की तरह होगी जहां अधिकतर शक्तियां केंद्र के प्रतिनिधि राज्यपाल या उप राज्यपाल के पास होंगी।

राजनीति

बंगाल में दिखा राजनीति का धर्म नहीं, बस धर्म की राजनीति

राजनीति में सबसे बड़ी बात होती है जिससे समाज और देश का भला हो सकता है वह है राज करने की नीति और उसके धर्म का पालन लेकिन आज के समय में न नीति है, न नियत है, न मुद्दे हैं. देश लोकतंत्र के त्योहार का उत्साह मना रहा है. बड़े छोटे दलों ने लगभग […]

राजनीति

सोशल मीडिया पर मिल रही सलाह, किसे और क्यों दल बनायें उम्मीदवार

राजनीति में इति या अंत नाम कि शब्दावली का कोई प्रयोग नहीं है। हिंदी से लेकर ऑक्सफ़ोर्ड तक कि डिक्शनरी आप पलट लीजिए लेकिन उसमें कोई ऐसा शब्द नही जो भारतीय लोकतंत्र को समझा सके। ऐसा इसलिए नही कि डिक्शनरी लिखने वालों की जानकारी कम है बल्कि ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां लोकतंत्र का मतलब […]