प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से देश में आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण और रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए 100 लाख करोड़ रुपये की गतिशक्ति योजना शुरू किए जाने की घोषणा की।

प्रधानमंत्री गतिशक्ति- नेशनल मास्टर प्लान के जरिए औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ एयरपोर्ट, नई सड़कों और रेल योजनाओं सहित यातयात की व्यवस्था को दुरूस्त करेगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “जल्द ही देश में ‘प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना’ का ऐलान किया जाएगा, ये 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक की योजना होगी जो लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लाएगी। ये देश के लिए मास्टरप्लान होगा जो नए इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखेगा।”

उन्होंने कहा कि इस दिशा में जल्दी ही गतिशक्ति- राष्ट्रीय मास्टर प्लान योजना शुरू की जाएगी जिसके जरिए 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गतिशक्ति-राष्ट्रीय मास्टर प्लान नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर लाएगी और बुनियादी के समग्र विकास में मददगार होगी। विकास को नई गति देने का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब हमें पूर्णता की तरफ जाना है।

इसके साथ राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की भी औपचारिक घोषणा करते हुए उन्होंने आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले, यानी 2047 तक, भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मिनर्भर बनाने का भी ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “भारत को आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ ढांचागत क्षेत्र के लिए एक समग्र रुख की जरूरत है।”

उन्होंने ऐसे विकास को हासिल करने की जरूरत बताई जहां सभी गांवों में सड़कें, सभी परिवारों के पास बैंक खाते, शत प्रतिशत लाभार्थियों के पास आयुष्मान भारत का कार्ड, और सभी पात्र व्यक्तियों के पास उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन हो। उन्होंने बताया कि भारत गैस आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ने से प्राप्त एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर तथा बिजली से चलने वाली रेल, वाहनों के जरिये ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कहा कि देश की प्रगति और आत्मनिर्भर भारत के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी है जिसके लिए भारत को यह संकल्प लेना चाहिए कि आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएंगे। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च देश को करना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि 7 साल पहले भारत में 8 अरब डॉलर के मोबाइल फोन्‍स इम्पोर्ट किए जाते थे। लेकिन भारत में अब हर साल 3 अरब डॉलर के मोबाइल फोन्‍स का एक्सपोर्ट होता है। इसके अलावा भारत को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में ‘होलिस्टिक अप्रोच’ अपनाने की भी जरूरत की बात कही।

किसानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “हमारा सपना है कि छोटे किसान देश की शान बने। आने वाले वर्षों में हमें देश के छोटे किसानों की सामूहिक शक्ति को और बढ़ाना होगा। उन्हें नई सुविधाएं देनी होंगी।”

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