संसद में शुरू हुए इस बार के मानसून सत्र में अलग ही नजारा देखने को मिला। जहां विपक्ष लगातार अपनी मांगों को लेकर हंगामे पर अड़ा रहा वहीं सरकार की ओर से ऐसे कई बिल और विधेयक बिना चर्चा के पारित और पास कर दिए गए।

लोकसभा और राज्यसभा में सांसदों के मर्यादाहीन आचरण, जैसे पेपर फाड़कर लहराना, मेज और कुर्सी के ऊपर चढ़ जाना, सभापतियों के सामने नारेबाजी करना, के कारण सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

ऐसे व्यवहार और आचरण के ऊपर दोनों सदनों के सभापतियों और केंद्र के सांसदों ने दुख जताया। संसद में हुए इस हंगामे पर लोग सोशल मीडिया पर भाजपा नेता सुषमा स्वराज को याद करने लगे कि विपक्ष में रहते हुए सुषमा स्वराज जिस तरह से अपनी बातों को रखती थी उसकी प्रशंसा विरोधी दल के नेता भी करते थे।

उनके अंदाज को याद करते हुए लोग वीडियो भी शेयर कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस युवा कमेटी के अध्यक्ष श्रीनिवास ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सुषमा स्वराज द्वारा सदन में दिए गए एक भाषण का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि “एक थी संसद,एक था लोकतंत्र,एक थी संसदीय मर्यादाएं एक था पक्ष-विपक्ष का रिश्ता। अब तो विपक्ष के साथ निजी शत्रुता और तानाशाही के ‘अवशेष’ ही शेष है।”

यह वीडियो 2014 के लोकसभा चुनाव होने के वक्त का है जिसमें सुषमा स्वराज ने सदन में भाषण देते हुए कहा था कि “यह इसलिए हुआ क्योंकि भारतीय लोकतंत्र के मूल में एक भाव है…. और वो भाव क्या है? वह भाव क्या है कि हम एक दूसरे के विरोधी हैं मगर शत्रु नहीं।

और हम विरोध करते हैं विचारधारा के आधार पर। विरोध करते हैं नीतियों के आधार पर….हम विरोध करते हैं कार्यक्रमों के आधार पर… अलग-अलग है.. विचारधारा है। अलग-अलग नीतियां सरकार बनाती है अलग-अलग कार्यक्रम बनाती है। उस पर हम आलोचना करते हैं। वो आलोचना प्रखर भी होती है।

लेकिन प्रकार के प्रखर आलोचना भी भारतीय लोकतंत्र में एक दूसरे के व्यक्तिगत संबंधों में आड़े नहीं आती।” आगे वह हंसते हुए कहती हैं कि “मेरे भाई कमल नाथ अपनी शरारत से इस सदन को उलझा देते थे… और आदरणीय शिंदे जी अपनी शराफत से उसे सुलझा देते थे।

और इस शरारत और शराफत के बीच बैठी हुई सोनिया जी की मध्यस्थता, आदरणीय प्रधानमंत्री जी की सौम्यता, आपकी सहनशीलता और आडवाणी जी न्यायप्रियता के कारण यह सदन चल सका।”

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