बिहार में कल तीसरे चरण के मतदान के लिए प्रचार-प्रसार का शोर थम गया. 7 तारीख को तीसरे चरण के लिए 78 सीटों पर मतदान होना है. इसमें 1208 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है. अंतिम चरण के लिए सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी. सभी ज्यादा से ज्यादा रोड शो और चुनावी रैलियां कर अधिक से अधिक जनता तक पहुंचना चाहते थे.

पहले दो चरणों में जहां नौकरी, भ्रष्टाचार, पलायन, कोरोना महामारी, बेरोज़गारी जैसे मुद्दे हावी रहे वहीँ तीसरे चरण में इसके उलट CAA-NRC, घुसपैठ और बूचड़खाना जैसे मुद्दों ने जगह लेली. सभी पार्टियों के दिग्गज नेता ज्यादा से ज्यादा रैलियां करते नज़र आये.

अंतिम चरण में  जहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने 2 ही रैलियों को सम्भोदित किया वहीँ कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने 4 चुनावी रैलियां की. बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार एक दिन में 4-5 रैलियां करते नज़र आ रहे थे वहीँ महागठबंधन के मुख्यमंत्री के उम्मीदवार तेजस्वी यादव एक दिन में 12 से 14 रैलियां कर रहे थे. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सीमांचल में अपना तम्बू गाड़ रखा था और हर रोज़ 3-4  रैलियां कर रहे थे.

तीसरे चरण के लिए यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने NDA के लिए 12 रैलियां की. वहीँ दूसरी और लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने रैलियों के साथ-साथ रोड शो पर भी पूरा ज़ोर दिया. उन्होंने अंतिम चरण में अपनी पूरी ताकत लगा दी थी.

पहले दो चरणो के मुकाबले तीसरे चरण में मुद्दे काफी उलट दिखे. प्रधानमंत्री मोदी ने अररिया और सहरसा की रैली में जहां भारत माता की जय के नारे का मुद्दा उठाया, वहीँ भारत-चीन सीमा विवाद पर भारत का कड़ा रुख दिखाकर वोट मांगे. वहीँ मोदी ने लालू प्रसाद यादव के जंगल राज का भी ज़िक्र किया.

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के चुनावी अजेंडा NRC और CAA के इर्द-गीर्द ही घूमता दिखाई दिया. वह इन मुद्दों को उठाकर मुस्लिम वोट अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे थे. वहीँ नितीश कुमार ने साफ़ किया की किसी की इतनी हिम्मत नहीं की बिहार में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई बाहर निकाल सके. जबकि योगी आदित्यनाथ ने खुलकर कहा की NDA की सर्कार आएगी तो घुसपैठियों को बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा. तेजस्वी यादव इस मुद्दे पर बोलने से बचते दिखाई दिए.  

आखिरी चरण में बूचड़खाने का मुद्दा भी छाया रहा. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दावा किया की अगर हम फिर से सरकार में आये तो सिर्फ 15 दिनों के अंदर ही सभी बूचड़खानों पर ताले लटके मिलेंगे.

राहुल गाँधी ने फिर से EVM का मुद्दा उठाया मगर अंदाज़ कुछ हटके था. राहुल गांधी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का मशीन (ईवीएम) का नाम मोदी वोटिंग मशीन (एमवीएम) है, लेकिन इस बार बिहार के युवाओं में गुस्सा है इसलिए मोदी वोटिंग मशीन के बावजूद महागठबंधन बिहार चुनाव जीतने जा रहा है.

तेजस्वी यादव पहले दिन से लेकर प्रचार के आखिरी दिन तक 10 लाख नौकरियों की बात को दोहराते नज़र आये. उनका साफ कहना था की लोगों को रोजगार देने वाली सरकार को चुनना चाहिए. 

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