अमेरिका के बाद अब वर्ल्ड बैंक ने रोकी अफगानिस्तान को दी जाने वाली मदद, मुश्किल में तालिबान

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद अधिकतर देशों ने इस शासन को मंजूरी नहीं दी है। इस बीच अब वर्ल्ड बैंक ने भी तालिबानी शासन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अफगानिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर रोक लगा दी है।

विश्व बैंक के प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी है कि “अफगानिस्तान को आर्थिक मदद देने पर रोक लगा दी गई है। हम अभी निगरानी और आकलन कर रहे हैं।”

वर्ल्ड बैंक ने अफगानिस्तान के हालात, खासतौर पर महिला अधिकारों की स्थिति से चिंतित होकर यह फैसला लिया। विश्व बैंक के मौजूदा समय में अफगानिस्तान के अंदर दो दर्जन से ज्यादा प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।

बैंक की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, साल 2002 से लेकर अब तक बैंक की तरफ से अफगानिस्तान देश को 5.3 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। एक अधिकारी ने बताए अनुसार वर्ल्ड बैंक ने साल 2002 में तालिबान के पतन से बीते दिनों तक अफगानिस्तान को 5.3 अरब डॉलर की मदद दी थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए उसने हाथ खींच लिए हैं। वर्ल्ड बैंक के इस फैसले से तालिबान को अफगानिस्तान संभालने में काफी मुश्किलें आ सकती है।

वहीं, इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने भी अफगानिस्तान की आर्थिक मदद और तालिबान द्वारा अफगानिस्तान को अपने संसाधनों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।

आईएमएफ ने 460 मिलियन अमरीकी डॉलर यानी 46 करोड़ डॉलर (3416.43 करोड़ रुपये) के आपातकालीन रिजर्व तक तालिबान की पहुंच को ब्लॉक करने की घोषणा की थी, क्योंकि इस कट्टरपंथी नियंत्रण ने अफगानिस्तान देश के भविष्य के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है।

इससे पहले अमेरिका ने भी बीते हफ्ते यह ऐलान किया था कि वह अपने देश में मौजूद अफगानिस्तान के सोने और मुद्राभंडार को तालिबान के कब्जे में नहीं जाने देगा। ज्ञात हो कि अकेले अमेरिका में ही अफगानिस्तान की करीब 706 अरब रुपये की संपत्ति है।

बाकी देशों में, जर्मनी और यूरोपीय संघ के अलावा कनाडा भी कह चुका है कि वह किसी सूरत में तालिबान के शरीयत वाले शासन को वित्तीय मदद नहीं देगा।

हालांकि चीन की ओर से यह संकेत दिया गया है कि वह तालिबान को वित्तीय मदद दे सकता है। चीन ने कहा है कि वह युद्धग्रस्त देश की मदद में सकारात्मक कदम उठाएगा। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार अमेरिका ने अफगानिस्तान को संकट में डाला है तो ऐसे में अमेरिका अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए कुछ किए बिना ऐसे ही उसे छोड़कर नहीं जा सकता। इससे पहले भी चीन ने तालिबान की तारीफ की थी और अफगानिस्तान में अपने पैर पसारने के बारे में भी संकेत दिए थे।

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