बड़े नामों को कैबिनेट से हटा पीएम मोदी ने दिया संदेश, नाम बड़े और दर्शन छोटे का फॉर्मूला नही चलेगा

मोदी सरकार 2.0 का कैबिनेट विस्तार अंततः हो गया। यह कैबिनेट विस्तार कई मामलों में अहम है। एक तरफ इस मंत्रिमंडल विस्तार में जहां कई बड़े नामों को मंत्री पद से हटाया गया 

वहीं कई नए और चौंकाने वाले नाम शामिल किए गए। सबसे खास बात यह रही कि टीम मोदी में अब 11 महिलाएं सत्ता के शीर्ष नेतृत्व का सहयोग करती नजर आएंगी।

इसके अलावा हर राज्य और बिरादरी के साथ सहयोगी दलों का भी मंत्रिमंडल विस्तार में पूरा ध्यान रखा गया। इसके साथ ही एक मैसेज स्पष्ट तौर पर देने की कोशिश की गई है कि आपका नाम कितना भी बड़ा है अगर आप परफॉर्म करने वालों में शामिल नही हैं तो पद की उम्मीद न करें।

कल मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद विपक्ष सरकार की आलोचना में लगा है। स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को हटाने के पीछे भी कई कारण तलाशे जा रहे हैं और लॉजिक दिए जा रहे हैं। 

खैर इस बात से इनकार नही किया जा सकता कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान डॉ हर्षवर्धन की कार्यशैली लगातार सवालों के घेरे में रही थी। खुद पीएम को ऑक्सीजन की आपूर्ति से लेकर हर चीज पर बारीक नजर रखनी पड़ी थी।

ऐसे में यह तो तय था कि उनसे स्वास्थ्य मंत्रालय लिया जाएगा लेकिन यह शायद ही किसी ने सोचा होगा कि हर्षवर्धन जैसे वरिष्ठ नेता को मंत्रालय से ही बेदखल कर दिया जाएगा।

इसके अलावा रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे नामों को मंत्रालय से हटाए जाने का फैसला भी चौंकाने वाला है। निशंक ऐसे वक्त में नजरों से ओझल रहे जब देश भर के विद्यार्थी कोरोना काल मे अपनी परीक्षा और भविष्य को लेकर उनकी तरफ टकटकी लगाए देख रहे थे।

 अंततः बात सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची और उसके बाद पीएम मोदी को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। ऐसे में यह कहना गलत नही होगा कि निशंक भी कोरोना की दूसरी लहर की भेंट चढ़ गए। 

अब बात प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद की करें तो ट्विटर के साथ हालिया विवाद, बयानबाजी और कोई निष्कर्ष न निकाल पाना इन दोनों के लिए बड़ी आफत साबित हुआ। 

इसका अनुमान भी पहले से था क्योंकि सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार जावड़ेकर और प्रसाद को हटाने की मांग कर रहे थे। 

यह तो बात हुई कि किसे क्यों मंत्रालय से विदाई लेनी पड़ी। अब बात करते हैं कि इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में खास क्या है? इस मंत्रिमंडल की सबसे खास बात यह है कि इसमें 11 महिला मंत्री हैं। इस कैबिनेट की औसत आयु 58 साल है यानि इसे बहुत हद तक युवा कैबिनेट कह सकते हैं। इसमें से 14 मंत्री ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 साल से कम है। इन मंत्रियों में 13 पेशे से वकील हैं। 

7 मंत्री सिविल सर्विसेज में रह चुके हैं। 6 डॉक्टर और 5 इंजीनियर भी इस मोदी कैबिनेट में शामिल हैं। ऐसे में कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह कैबिनेट अनुभव और जोश दोनो का संयुक्त मिश्रण है।

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