केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के बीच संभावित मंत्रियों के नाम को लेकर अटकलें जारी है। हालांकि अभी भी जदयू के कोटे से मंत्रियों की संख्या तय नहीं हुई है। चर्चाएं हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पार्टी के कोटे में से चार मंत्री चाहते हैं जिसे लेकर उन्होंने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं।

इसे ‘बिहार फॉर्मूला’ कहा जा रहा है। जदयू का मानना है कि लोकसभा में पार्टी की संख्या के अनुरूप मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए। राज्य से भाजपा के 17 सांसद हैं इसलिए उसके पांच मंत्री हैं तो वहीं जदयू से 16 सांसद है तो उसके कोटे से चार मंत्री होने चाहिए।

इससे पहले नीतीश कुमार ने यह तर्क रखा था कि मंत्रिमंडल विस्तार में यह तरीका उन सहयोगी दलों के लिए नहीं होना चाहिए जिन्होंने एनडीए को जिताने और सरकार बनाने में बहुत कम सहयोग दिया हो। उनका निशाना लोक जनशक्ति पार्टी की ओर था।

पार्टी की तरफ से अतिपिछड़ा, महादलित को प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई है। जदयू ने कहा कि भाजपा से जिन्हें मंत्री बनाया गया है उनमें चार ऊंची जाति के और एक यादव है। बताया जा रहा है कि मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे मंत्रिमंडल विस्तार में करीब 20 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।

इससे पहले जदयू नेता उमेश कुशवाहा ने कहा था कि पार्टी की तरफ से मंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला नीतीश कुमार लेंगे। मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर नीतीश कुमार की तरफ़ से आए बयान‌ में यह इशारा किया गया कि जदयू भी इस बार मंत्रिमंडल में शामिल हो सकती है।

नीतीश कुमार ने कहा, “हमारी पार्टी के अध्यक्ष आरसीपी सिंह इसपर बात कर रहे हैं। वह हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।वह इस मामले को देख रहे हैं।इस मामले पर वह ही कुछ कह सकते हैं।”

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