बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान हो चुका है। हालांकि तारीखों के एलान के 24 घंटे बीतने के बावजूद भी अभी तक एनडीए और महागठबंधन में सीटों के बंटवारे और टिकट बंटवारे पर पेंच फंसा हुआ है।
इसके अलावा एक तरफ जहां रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा ने तेजस्वी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है वहीं दूसरी तरफ चिराग पासवान ने एनडीए में नीतीश की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं।
इन सब के बीच सबसे बड़ी दुविधा और राजनीतिक भंवर में फंसते नजर आ रहे हैं उपेंद्र कुशवाहा।
कभी बीजेपी के साथ शामिल होकर बिहार में चुनाव लड़ने वाले और केंद्र में मंत्री बनने वाले उपेंद्र कुशवाहा की महत्वाकांक्षाएं बढ़ी तो वह बीजेपी को छोड़ राजद के साथ हो लिए। हालांकि अब उनकी हालत वहां ऐसी है कि न माया मिली न राम। यह उनके बयानों में भी नजर आ रहा है।
पहले उन्होंने सीट बंटवारे पर विष पीने की बात कही और कोई खास मांग नही की लेकिन इसके बावजूद जब राजद से जवाब न मिला तो उनके सब्र का बांध टूटता नजर आने लगा।
बाद में उनकी पार्टी के तरफ से बयान आया कि हम नए विकल्प देखने को स्वतंत्र है। उन्हें उम्मीद थी कि एनडीए में उनकी एंट्री आसानी से हो जाएगी। हालांकि पहले राजद से भाव न मिलने और अब नीतीश की ना से उनकी एनडीए में एंट्री मुश्किल नजर आने लगी है।
इसके साथ ही अब उनके सामने अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद है। देखना है कि कुशवाहा और उनके दल का बिहार चुनावों में क्या अंजाम होता है।
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