उपेंद्र कुशवाहा के सामने अब अस्तित्व बचाने की लड़ाई, महागठबंधन में बेकद्री,एनडीए में नो एंट्री

बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान हो चुका है। हालांकि तारीखों के एलान के 24 घंटे बीतने के बावजूद भी अभी तक एनडीए और महागठबंधन में सीटों के बंटवारे और टिकट बंटवारे पर पेंच फंसा हुआ है।

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बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जा चुका है। कोरोना काल मे यह पहला चुनाव है। ऐसे में इसको लेकर गाइडलाइंस आयोग पहले ही जारी कर चुका है। तारीखों के एलान के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

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बिहार विधानसभा चुनावों के मद्देनजर हर दल और नेता कैसे भी एक मनोवैज्ञानिक बढ़त ले लेना चाहता है। बात सोशल मीडिया की करें, ग्राउंड लेवल कैंपेन की करें या पारंपरिक चुनाव के प्रचार के तरीकों की हर दल में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी हुई है।

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बिहार में चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक तपन तेजी से बढ़ रही है। एक तरफ जहां सरकार वादे, यादें, शिलान्यास और उद्घाटन से जनता को विकास और अपनी कामयाबी की बातें बताने में जुटी है वहीं दूसरी तरफ विपक्ष लगातार हमलावर है। खास कर कृषि संबंधित बिल ने जैसे विपक्ष को संजीवनी दे दी है और इसको लेकर सरकार को लगातार तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

जारी है बिहार में विधायकों को खदेड़ने का सिलसिला, जनता मांग रही हिसाब, विधायक कर रहे वादे, पढ़ें

5 साल तक चुनाव जीत नदारद रहने वाले विधायकों की राह इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में मुश्किल नजर आ रही है। लोकलुभावन वादे कर जीतने वालों से अब जनता हिसाब मांग रही है। क्षेत्रीय समस्याओं पर लोगों के गुस्से का सामना अभी तक बिहार में कई विधायक कर चुके हैं।

बिहार चुनावों से पहले जानें किन दलों को मिला नया चुनाव चिन्ह, पप्पू को कैंची तो मांझी को पैन, जानें पूरा ब्यौरा

बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियां जारी है। कहीं एक दूसरे पर जम कर आरोपो के तीर चलाये जा रहे तो कहीं चुनावी बिसात पर ऐसी गोटियां बिछाई जा रही है जिससे जीत में कोई कोर कसर बाकी न रहे। गठबंधन में सीटों के बंटवारे अपर तो नेताओं में टिकट को लेकर उलझन की स्थिति है। इसी बीच चुनाव आयोग ने कुछ दलों को नया चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया है।

दिग्गज नेता भोला राय ने भी छोड़ी राजद, अब अपने तरकश से चलाएंगे जदयू के तीर

राष्ट्रीय जनता दल को आज एक और तगड़ा झटका लगा जब उसके दिग्गज नेता भोला राय ने नितीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड का हाथ थाम लिया. दो दिन में राजद के लिए ये दूसरा बड़ा झटका है. इससे पहले लालू के बेहद करीबी माने जाने वाले दिग्गज नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी कल पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.

बिहार चुनाव- सीट बंटवारे की उहापोह से परेशान दल, संभावित उम्मीदवारों में भी संशय की स्थिति

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार विधानसभा चुनाव अपने तय समय पर होंगे। इन चुनावों को लेकर दल और उनके नेता अपनी कमर कसने में कोई कोर कसर नबी छोड़ना चाहते हैं। बागियों को सहारा देने से न तो परहेज़ है न रूठे यारों को मनाने से लेकिन उस बीच एक संकट ऐसा है जो हर दल और गठबंधन के नेताओं में आम है।

बिहार विधानसभा चुनाव- नितीश सरकार और राजद में ज़ुबानी जंग तेज़, एक दूसरे को बता रहे है बीते युग की पार्टी

बिहार विधानसभा चुनाव- नितीश सरकार और राजद में ज़ुबानी जंग तेज़, एक दूसरे
को बता रहे है बीते युग की पार्टी

इस दिन हो सकता है बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान, कोरोना काल मे चुनाव कराने वाला पहला राज्य होगा

बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर सत्तापक्ष की जिद्द और विपक्ष की चुनाव न कराने की मांग के बीच अगले एक दो दिनों में चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। कोरोना संकट के बीच बिहार ऐसा पहला राज्य होगा जहां चुनाव होंगे। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग 13 सितम्बर को तारीखों का ऐलान कर सकता है। यह अनुमान इसलिए लगाए जा रहे क्योंकि वर्तमान विधानसभा के चुनावी तारीखों का ऐलान भी 9 सितम्बर को हुआ था।

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बिहार विधानसभा चुनावों की बिसात बिछने लगी है। नफा-नुकसान का आकलन शुरु हो गया है। इसी के साथ पहले शुरु हुआ नेताओं के पाला बदलने का खेल, फिर हुआ दल बदलने का खेल और अब शुरू है आरोप-प्रत्यारोप का दौर। आरोप प्रत्यारोप भी अगर सत्ता पक्ष और महागठबंधन के बीच हो तो शायद इसमें कुछ नया नही माना जाता लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है कि तर्ज पर पहले जहां मांझी, नीतीश के साथ आ मिले वहीं एनडीए के पुराने पार्टनर लोजपा ने मोर्चा खोल दिया।

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बिहार चुनावों को लेकर वक़्त जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे दलों और नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार मोर्चा संभाले नजर आ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी आरोपों के तीर जदयू की तरफ हर दिन चला रहे हैं। आज पहले जहां तेजस्वी ने नीतिश पर हमला बोलते हुए दस सवाल पूछे थे वहीं अपनी पहली डिजिटल रैली के माध्यम से नीतीश ने अब पलटवार किया है।

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बिहार चुनावों को लेकर अब आरोप-प्रत्यारोप का तीखा दौर शुरू हो गया। वर्चुअल रैली और सम्मेलन के भरोसे कोरोना के इस दौर में चुनावी बाजी जीतने की जंग है। वर्चुअल तरीके से अभी तक बीजेपी सभी दलों से आगे है वहीं जदयू भी बीजेपी के ठीक पीछे है। अब जब सत्ता पक्ष एक्टिव है तो विपक्ष की मजबूरी ही सही लेकिन करना तो पड़ेगा ही। ऐसे में कांग्रेस भी गुरुवार से जहां डिजिटल प्रचार अभियान की शुरुआत करेगी वहीं राजद पहले से महागठबंधन की तरफ से मोर्चा संभाल रही है।

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बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर अब दल और नेता सक्रिय नजर आने लगे हैं। समीकरण साधने के लिए क्या दुश्मन क्या दोस्त सब जायज है। कहीं रूठे यारों को मनाने का क्रम जारी है तो कहीं पाला बदल सुरक्षित हो जाने की जद्दोजहद है वहीं हमेशा की तरह सत्ता पक्ष के तरकश में शिलान्यास, उद्घाटन के साथ हर वर्ग को लुभाने के लिए कुछ न कुछ वादे हैं।

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आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के बीच कोई भी दल या नेता किसी भी तरह का कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहता है। यही वजह है कि वोट बैंक और जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए चुनावी समीकरण के हिसाब से लाभ-हानि का गणित लगाया जा रहा है। इसी क्रम में जीतन राम मांझी जहां अब नीतीश कुमार के साथ हैं वहीं अब एक और बड़े नेता को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ चली है।