बिहार विधानसभा चुनावों के मद्देनजर हर दल और नेता कैसे भी एक मनोवैज्ञानिक बढ़त ले लेना चाहता है। बात सोशल मीडिया की करें, ग्राउंड लेवल कैंपेन की करें या पारंपरिक चुनाव के प्रचार के तरीकों की हर दल में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी हुई है।
इसी होड़ को जीतने या आगे निकलने का एक माध्यम पोस्टर वॉर है जो बिहार की राजधानी पटना में खासतौर पर दिलचस्प बना हुआ है।
पटना में हाल के दिनों में एक के बाद एक कई पोस्टर लगे दिखे हैं। आलम यह है कि पटना के लोगों को हर सुबह तंज, विरोध और समर्थन के अलग-अलग पोस्टरों का दीदार हो रहा है। इन पोस्टरों के अपने अपने मायने भी निकाले जा रहे हैं।
सबसे पहले 6 सितंबर को लालू यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर जारी कर कहा बिहार पर भार नीतीश कुमार। इसके बाद तो जैसे एक होड़ की शुरुआत हो गई।
अब पिछले कुछ दिनों की बात करें तो पटना में लालू परिवार पर निशाना साधने वाला पोस्टर सबसे पहले चर्चा में आया। इसमे लालू को सजायाफ्ता कैदी बताया गया था और उनके परिवार को बिहार पर भार। इसके बाद राजद की तरफ से पोस्टर जारी किए गए।
इन पोस्टरों से लालू-राबड़ी और अन्य गायब दिखे थे और तेजस्वी के चेहरे के साथ युवा सरकार, अबकी बार जैसे नारे लिखे गए थे।
वहीं नीतीश कुमार्के साथ पीएम मोदी का पोस्टर भी खास चर्चा में था। जिसमे पीएम मोदी के बयान की ‘नीतीश जी जैसे सहयोगी हों तो कुछ असंभव नही’ वहीं नीतीश की बात पक्की जैसे स्लोगन भी नजर आए थे।
अब इसी पोस्टर पर विपक्ष की तरफ से जवाब देते हुए कुछ पोस्टर पटना में आज सुबह नजर आए। इनमे पीएम के ही एक पुराने को आधार बनाते हुए लिखा गया- नीतीश के डीएनए में गड़बड़ी है। इसके साथ ही लिखा गया मारते रहेंगे बस पलटी, नीतीश की हर बात कच्ची।
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