जेएनयू के पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष और सीपीआई का युवा चेहरा कन्हैया कुमार ने इस बार बिहार विधानसभा चुनाव न लड़ने का मन मना लिया है. एक निजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कन्हैया कुमार ने कहा की वह बिहार में रहकर पार्टी के लिए चुनाव में प्रचार-प्रसार करेंगे और साथ ही पार्टी को मजबूत करने का काम करेंगे. कन्हैया ने इस बात पर भी ज़ोर दिया की उनकी पार्टी आरजेडी और कांग्रेस के साथ कंधे से कन्धा मिलकर यह चुनाव लड़ेगी.
लॉकडाउन लगने से पहले कन्हैया बिहार में घूम-घूमकर CAA और NRC के विरुद्ध लोगों में राय बनाने में लगे हुए थे. कन्हैया की सभाओं में अच्छी खासी भीड़ देखी जा सकती थी जिसे देखकर ये कयास लगाए जा रहे थे की कन्हैया कुमार इस बार बिहार से विधानसभा का चुनाव ज़रूर लड़ेंगे. मगर कन्हैया ने सारी अटकलों पर विराम लगा दिया
जब इंटरव्यू में कन्हैया के ऊपर कोरोना महामारी के दौरान गायब होने का आरोप लगा तो इस पर कन्हैया ने कहा की वह ज़रूरतमंदो की मदद में लगे हुए थे जिस कारण वह मीडिया से दूर रहे. बेगूसराय की सीट की बात करते हुए कन्हैया ने कहा की इस बार पार्टी चाहती है की वहाँ से किसी नए कैंडिडेट को उतरा जाये.
वहीँ दूसरी ओर मीडिया में छपी खबरों की माने तो कन्हैया के चुनाव न लड़ने के पीछे एक और कारण तेजस्वी यादव को भी माना जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कन्हैया का बिहार में बढ़ता कद तेजस्वी को कहीं न कहीं अखरती है.
बिहार चुनाव में मुद्दों को लेकर कन्हैया बोले की इस बार कोरोना के सामने सरकार की विफलता, मज़दूरों का पलायन, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, कृषि आंदोलन आदि मुख्य मुद्दे रहेंगे.
