देश मे इन दिनों अजीब माहौल है। असली मुद्दे गौण हैं और ऐसे मुद्दे चर्चा में हैं जो समझ से ही परे हैं। कहीं जातीय उन्माद है, कहीं धार्मिक उन्माद है तो कहीं आरक्षण के विरोध और समर्थन में हल्ला बोल है।
छात्रों की मांग है कि सरकार उन्हें लिखित में आश्वासन दे कि परीक्षाओं में हुई धांधली की सीबीआई जांच होगी लेकिन अभी तक एसएससी या सरकार ने सिर्फ मौखिक आदेश दिया है।
आज जब भी हम अपने आसपास होने वाली घटनाओं या खबरों के बीच से गुजरते हैं तो हर दिन कहीं न कहीं, किसी न किसी के आत्महत्या की खबर उसमे जरूर होती है। इससे प्रभावित तो हर वर्ग है लेकिन खास कर युवाओं में यह प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है।
सिर्फ भारत की ही बात करें और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर गौर करें तो एक दशक के अंदर आत्महत्या के मामलों में 22.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।