संयुक्त किसान मोर्चा(एसकेएम) ने रविवार को यह ऐलान किया कि 19 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र के दौरान संसद के सामने केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ रोज़़ करीब 200 किसानों का एक समूह प्रदर्शन करेगा।
संसद का मानसून सत्र 19 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाला है। बता दें कि इससे पहले 8 जुलाई को पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन होगा।
कृषि कानूनों के विरोध में 40 से ज्यादा किसान संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में पिछले कई महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।
एसकेएम ने बताया कि सत्र शुरू होने के दो दिन पहले सदन के अंदर कानूनों का विरोध करने के लिए सभी विपक्ष के सांसदों को एक ‘चेतावनी पत्र’ दिया जाएगा। इस पर किसान नेता बलबीर सिंह राजेपाल ने कहा, “हम विपक्षी सांसदों से भी 17 जुलाई को सदन के अंदर हर दिन इस मुद्दे को उठाने के लिए कहेंगे, जबकि हम विरोध में बाहर बैठेंगे।
जब तक सरकार इस मुद्दे का समाधान नहीं करती तब तक सत्र को नहीं चलने दें।” उन्होंने लोगों से अपने कार, स्कूटर, ट्रैक्टर, ट्रॉली, बस को निकटतम राज्यमार्ग पर लाकर लगाने लेकिन जाम न करने की नसीहत दी। उन्होंने महिलाओं से भी इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनने की अपील की।
उन्होंने कहा कि शर्तों के साथ सरकार से बात नहीं करेंगे। जब तक कानूनों को निरस्त करने के लिए सहमति नहीं बनती, किसान बातचीत नहीं करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 1 जुलाई को जोर देकर कहा था कि केंद्र के तीनों कृषि कानून किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे और यह स्पष्ट किया कि सरकार इन कानूनों को निरस्त करने की मांग को छोड़कर विरोध करने वाले किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। किसानों का दावा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होंगे।
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