प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव होने की कही बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जम्मू कश्मीर के नेताओं के साथ दिल्ली स्थित पीएम आवास पर मुलाकात की। 2019 में अनुच्छेद 370 के रद्द होने और स्पेशल स्टेटस हटने के बाद केंद्र सरकार और राज्य के नेताओं के बीच यह पहली अहम बातचीत थी। प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई इस बैठक को केंद्र की ओर से जम्मू-कश्मीर राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

महबूबा को परिवार सहित पाकिस्तान चले जाना चाहिए- नितिन पटेल, उपमुख्यमंत्री, गुजरात

अब महबूबा के इसी बयान पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बड़ा बयान दिया है। नितिन पटेल ने अपने बयान में कहा कि अगर कोई यहाँ खुश नही है या सुरक्षित महसूस नही कर रहा है तो उसे कराची चला जाना चाहिए।

रविशंकर का महबूबा के बयान पर सेक्युलर लॉबी से सवाल- राष्ट्रविरोधी बयान पर क्यों हैं खामोश?

जम्मू कश्मीर की राजनीति में महबूबा को नजरबंदी से आजाद किये जाने के बाद हलचल बढ़ी हुई है। कश्मीर के सारे दल एक साथ एक मंच पर नजर आ रहे हैं। हालांकि इनके बयानों ने अब विवाद खड़े कर दिए हैं।

जम्मू-कश्मीर: महबूबा मुफ़्ती ने अनुच्छेद 370 हटने तक चुनाव नहीं लड़ने का किया फैसला

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा है की वह अब तब तक चुनाव नहीं लड़ेंगी जब तक जम्मू-कश्मीर में फिर से अनुच्छेद 370 की बहाली नहीं हो जाती. इसके लिए वह लगातार संगर्ष करती रहेंगी

Video- महबूबा के जेल से रिहा होते ही जम्मू में विपक्ष हुआ लामबंद, राजनीतिक तापमान बढ़ा

कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती को नजरबंद से मुक्त करने के बाद सियासी गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं पहले जहाँ उन्होंने अपने आवास पर एक बैठक कर कश्मीर के बड़े नेताओं से मुलाकात की वहीँ आज श्रीनगर में नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के घर पर धारा 370 हटाए जाने को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। इस बैठक में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी उपस्थित रही।

रिहा होते ही महबूबा मुफ़्ती का ऑडियो मैसेज आया सामने , कहा “काले दिन का काला फैसला हर पल मेरे दिल और रूह पर वार करता रहा”

रिहा होने के कुछ देर बाद ही महबूबा मुफ़्ती ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जम्मू-कश्मीर की आवाम के लिए एक 1.23 मिनट का ऑडियो सन्देश जारी किया जिसमें उन्होंने कहा “मैं आज एक साल से ज्यादा अर्से के बाद रिहा हुई हूं। इस दौरान 5 अगस्त 2019 के काले दिन का काला फैसला हर पल मेरे दिल और रूह पर वार करता रहा।

जम्मू में मनोज सिन्हा के बाद क्या कुछ और नया करने की फिराक में है केंद्र सरकार? पढ़ें

पहले मनोज सिन्हा का जम्मू-कश्मीर आना और अब शाह फैसल की वापसी यह संकेत देती हैं कि शाह कश्मीर में अहम भूमिका निभाएंगे।

सेना को आदेश थमा दो घाटी गैर नही होगी, जहाँ तिरंगा नही मिलेगा उसकी खैर नही होगी

कश्मीर में तिरंगे का अपमान होता रहा, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते रहे,सेना सीमा की हिफाज़त में अपनी कुर्बानी देती रही लेकिन एक उचित आदेश तक सरकार से तामिल न हो सका जिसमें यह लिखा हो कि सेना अपने हिसाब से इस तरह की घटनाओं से निपट ले।