Bihar Opinion Poll- एनडीए की वापसी के संकेत, बीजेपी बन सकती है सबसे बड़ी पार्टी, रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा, जानें

बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर नामांकन और प्रचार का दौर शुरू हो चुका है। आज से सीएम नीतीश कुमार जहां फिजिकल रैलियों को संबोधित करना शुरू करेंगे वहीं तेजस्वी यादव आज राघोपुर से बतौर उम्मीदवार नामांकन भरने जा रहे हैं।

निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों के पंजीकरण के लिए सार्वजनिक सूचना समय अवधि में छूट दी

निर्वाचन आयोग ने उन राजनीतिक दलों के लिए नोटिस की अवधि 30 दिन से घटाकर 7 दिन करने की छूट दी है,

राजद के पूर्व प्रदेश सचिव की हत्या, तेजस्वी-तेजप्रताप समेत 6 पर केस, पढ़ें

बिहार विधानसभा चुनावों के एलान के बाद से राजनीतिक गतिविधियां और चुनावी तैयारियां लगातार जारी हैं। दल, गठबंधन, उम्मीदवार और मुद्दे तय किये जाने लगे हैं। हालांकि इन खबरों के बीच बिहार में राजनीतिक हत्याओं के भी एक दौर शुरू होता दिख रहा है।

बीजेपी में शामिल हुईं श्रेयसी सिंह, इस सीट से हो सकती हैं उम्मीदवार, एलान कल

श्रेयसी सिंह ने आज दिल्ली में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है। उन्हें भूपेंद्र यादव ने बीजेपी की सदस्यता दिलाई। इसके बाद वह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात करने पहुंची। माना जा रहा है कि वह बाँका या अमरपुर विधानसभा से बीजेपी की प्रत्याशी हो सकती हैं।

आरजेडी में आने के बावजूद फंस गया श्याम रजक का टिकट, जानें अब क्या है विकल्प?

राजनीति का ऊंट कब किस करवट बैठे कहना या अनुमान लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। यहां न किसी का कोई परमानेंट दुश्मन है और न दोस्त। न किसी वादे का न किसी इरादे की यहां कोई जगह है। अब आप सोच रहे होंगे कि हम ऐसी बातें क्यों लिख रहे?

बिहार चुनाव- उम्मीदवारों पर संशय के बीच पहले चरण के लिए अधिसूचना जारी, 7 मंत्रियों की इज्जत दांव पर

बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों के एलान के बक़द आज 28 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण के चुनाव के लिए आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है। इस चरण में 16 जिलों की 71 सीटों पर मतदान होना है।

बिहार में कोरोना के बाद बाढ़ से हाहाकार, लाखों प्रभावित, सीएम ने लिया जायज़ा

बाढ़ से बिहार के 38 में से 16 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। लाखों की आबादी अपना सब कुछ गंवा कर जान बचाने की जद्दोजहद कर रही है।

बिहार में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे से तबाह हैं किसान

बिहार में हर साल बाढ़ और सूखा का प्रभाव बराबर रूप से होता है। मुआवजा का खेल भी चलता है लेकिन किसानों तक जब चेक पहुंचता है तो रकम हास्यास्पद होती है। उत्तरी बिहार में बाढ़ जहां हर साल तबाही की एक नई इबारत लिख फसल को तहस नहस कर जाती है वहीं दक्षिणी बिहार में सूखे से किसान बर्बाद होते हैं।

बिहार में कांग्रेस का क्या होगा?

कांग्रेस न सिर्फ बिहार में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है बल्कि वहां राजद के पीछे पीछे चलती दिख रही है। पार्टी नेतृत्व के अभाव और आपसी कलह से भी दो चार हो रही है।