राजनीति का ऊंट कब किस करवट बैठे कहना या अनुमान लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। यहां न किसी का कोई परमानेंट दुश्मन है और न दोस्त। न किसी वादे का न किसी इरादे की यहां कोई जगह है। अब आप सोच रहे होंगे कि हम ऐसी बातें क्यों लिख रहे?
चलिए बता देते हैं। दरअसल कुछ दिनों पहले जदयू छोड़ जब मंत्री रहे श्याम रजक राजद में शामिल हुए तो माना जा रहा था कि वह अपनी परंपरागत सीट से टिकट पक्का करने के मकसद से ऐसा कर रहे हैं।
श्याम रजक को शायद राजद की तरफ से वादा भी किया गया था। वह कोई कच्चे खिलाड़ी हैं नही तो ऐसे में बिना किसी विचार-विर्मश या ठोस वादे के वह राजद में आये नही होंगे लेकिन अब उनके टिकट पर पेंच फंसता नजर आ रहा है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि फुलवारीशरीफ सीट जहां से श्याम रजक चुनाव लड़ते हैं वह महागठबंधन में शामिल माले के हिस्से आई है। ऐसे में अब श्याम रजक के अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि उन्हें मसौढ़ी सीट का विकल्प दिया गया है।
अब देखना है कि श्याम रजक क्या फैसला लेते हैं। उम्मीद कम है कि वह मसौढ़ी से लड़ेंगे लेकिन अब अगर फुलवारीशरीफ पर माले ने अपना दावा नही छोड़ा या बात नही बनी तो मन मारकर उन्हें नई सीट से किस्मत आजमानी पड़ेगी और यहां उनकी राह मुश्किल नजर आती है।
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