सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की मानसिक सेहत की सुरक्षा के लिए स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों पर लागू होने वाली 15 अहम गाइडलाइंस जारी की हैं। यह फैसला उस याचिका पर आया, जिसमें एक छात्रा के पिता ने न्याय की मांग की थी। उनकी बेटी जुलाई में विशाखापट्टनम स्थित आकाश बायजूस कोचिंग में NEET की तैयारी के दौरान हॉस्टल की छत से गिरकर संदिग्ध हालात में मौत का शिकार हुई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश दो महीने के भीतर कोचिंग सेंटरों के लिए पंजीकरण, छात्र संरक्षण नियम और शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य करें।
हर जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई जाएगी, जो कोचिंग संस्थानों की निगरानी और शिकायतों की जांच करेगी।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से 90 दिनों में अनुपालन हलफनामा दायर करने को कहा है, जिसमें राज्य सरकारों के साथ समन्वय, निगरानी प्रणाली और राष्ट्रीय टास्क फोर्स की रिपोर्ट की टाइमलाइन शामिल हो।
गाइडलाइंस के मुताबिक, सभी शैक्षणिक संस्थानों में छात्र-परामर्शदाता अनुपात संतुलित किया जाएगा। परीक्षाओं और अकादमिक बदलावों के समय छात्रों को छोटे बैचों में समर्पित मेंटर्स या काउंसलर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे लगातार और गोपनीय सहयोग प्राप्त कर सकें।
