बिहार विधानसभा चुनावों में प्रचार का शोर हर बीतते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है। हर दल के शीर्ष और बड़े नेता अब उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए जी तोड़ मेहनत और धुंआधार रैलियां कर रहे हैं। कोरोना काल मे होरहे इस चुनाव में उम्मीद थी कि फिजिकल रैलियों में सख्ती होगी और कोरोना का खौफ हावी रहेगा लेकिन ऐसा होता नजर नही आ रहा है।


चुनावी रैलियों में भीड़ उमड़ रही है। हालांकि अभी तक भीड़ की बात करें तो नेताओं की एक बड़ी फौज के मैदान में उतारने के बाद एनडीए के हिस्से वह भीड़ नही दिख रही जो तेजस्वी या कन्हैया कुमार की रैलियों में उमड़ रही है।


बीजेपी ने अभी तक अपने बिहार के शीर्ष नेताओं सहित राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मनोज तिवारी, भूपेंद्र यादव सहित कई बड़े नेताओं को उतारा है वहीं जदयू की तरफ से सीएम नीतीश के अलावा सांसद ललन सिंह सहित कई बड़े नेता मैदान में हैं। इसके बावजूद ऐसा लग रहा कि एकतरफा दिख रहा यह चुनाव बीतते वक़्त के साथ रोचक मुकाबले में बदलता जा रहा है।


लोजपा की एंट्री ने एनडीए की मुश्किलें जहां बढ़ाई हैं वहीं राजद के लिए जैसे यह बिन मांगी मुराद जैसी है। हालांकि बीजेपी के नेताओं को अब भी उम्मीद है कि पीएम मोदी की बिहार चुनाव में एंट्री होते ही माहौल बदल जायेगा।

यही वजह है कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई शीर्ष नेता यह कह चुके हैं कि हम मोदी जी के नाम पर लड़ रहे और उनके नाम का फायदा न सिर्फ बीजेपी बल्कि सहयोगी दलों को भी मिलना तय है।


इससे पहले बीजेपी की तरफ से बिहार चुनाव प्रचार के लिए लांच किए गए गाने और ई-कमल वेबसाइट के भी केंद्र में मोदी ही नजर आए। बीजेपी की तरफ से जारी की गई स्टार प्रचारकों की दोनो सूची में पीएम का नाम पहले नंबर पर है।

ऐसे में कुल मिलाकर अगर बीजेपी की चुनावी रणनीति को देखें तो यह पीएम मोदी के नाम और चेहरे के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आ रही है। कहना गलत नही होगा बिहार में सीएम फेस भले नीतीश कुमार हैं लेकिन सहारा सिर्फ मोदी नाम का ही है।