अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद बाइडेन ने देश को किया संबोधित, फैसले का बचाव करते आए नजर

अमेरिकी सेनाओं की अफगानिस्तान से पूरी तरह वापसी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना बयान साझा किया। बाइडेन ने अफगानिस्तान में फंसे अमेरिकियों को वापस लाने का दावा किया और कहा कि अभी वहां पर करीब 100-200 अमेरिकी नागरिक फंसे हुए हैं।

फौजों की वापसी के बाद इन फंसे हुए अमेरिकियों को लेकर बाइडेन की आलोचना की जा रही थी। बाइडेन से जब इसपर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “जो नागरिक फंसे हैं, उनके पास अफगानिस्तान की भी नागरिकता है।

पहले इन लोगों ने अपने अफानिस्तानी मूल का हवाला देते हुए वहीं रुकने का फैसला किया था, पर अब वो वहां से निकलना चाहते हैं। अफगानिस्तान में जितने भी अमेरिकी थे और वापस आना चाहते थे, उनमें से 90% वापस आ चुके हैं।

जो फंसे हुए हैं, उनके लिए कोई डेड लाइन नहीं हैं। हम उन्हें वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” बाइडेन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए अफगानिस्तान में मिशन के नुकसान गिनाए और इसे समाप्त करना क्यों जरूरी था यह भी बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा “हमने अफगानिस्तान में जो किया है, वो कोई और नहीं कर सकता। यह हमारे लिए गौरव की बात है। हमारा मिशन सफल रहा है।” अफगानिस्तान से फौज की वापसी की जिम्मेदारी लेते हुए रणनीतिक लिहाज से ये फैसला जरूरी बताया। “हमने वहां करीब 20 साल तक शांति बनाए रखी।

गृह युद्ध में तालिबान से निपटने के लिए करीब तीन लाख सैनिकों को ट्रेंड किया।”

अपने संबोधन में साफगोई से स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति ने काबुल छोड़ने के अलावा सामने कोई और विकल्प नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा “मैं युद्ध को और लंबा नहीं खींचना चाहता था। तालिबान ने अपने पांच हजार कमांडरों को जेल से छुड़ाया। हमने तालिबान को सीजफायर के लिए मजबूर किया।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से अफगानिस्तान को लेकर हाल ही में पारित प्रस्ताव का जिक्र किया और कहा कि “हम इन देशों के साथ खड़े हैं। हम अफगानियों की मदद करते रहेंगे। मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे। हमने अफगानिस्तान में 20 साल तक शांति बनाए रखी।

हमने जो किया है वह कोई और नहीं कर सकता था। अब वहां तालिबान की सत्ता है। हम अफगान गठबंधन के साथ मिलकर काम करना चाहेंगे। तालिबान की मौजूदगी के बावजूद जो लोग निकलना चाहते थे, उनको वहां से निकाला। हमारी सेना ने पिछले 17 दिन में सवा लाख लोगों को एयरलिफ्ट किया।”

राष्ट्रपति ने आगे बताया कि “अब सौ-दो सौ अमेरिकी ही वहां हैं। ये जब आना चाहेंगे, उनको लाया जाएगा। इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हमने दया और करुणा के साथ लोगों को अफगानिस्तान से एयरलिफ्ट किया।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने देश के हित के लिए काबुल छोड़ने का निर्णय बताया। “हमने अफगानिस्तान में दो बिलियन राशि खर्च की। दो दशक तक इतनी बड़ी रकम खर्च करना ठीक नहीं। हम इस पैसे का इस्तेमाल अमेरिका के हित में करेंगे।

अमेरिका का बचाव हमारा मुख्य लक्ष्य है। अफगानिस्तान में बचाव की प्रक्रिया पूरी हुई। अफगानिस्तान में अमेरिका के 2400 सैनिक शहीद हुए जबकि 44 हजार सैनिक घायल हुए। हम नए तरीके से आगे बढ़ना चाहते हैं। कुछ लोगों का कहना था कि हमें यह मिशन और जल्दी शुरू करना चाहिए था।

लेकिन पूरे सम्मान के साथ मैं उनसे अपनी असहमति जाहिर करता हूं। अगर यह और पहले से शुरू किया गया होता तो सिविल वॉर में तब्दील हो जाता। वैसे भी कहीं से लोगों को निकालने में कुछ चुनौतियों का सामना तो करना ही पड़ता है।”

उन्होंने लोगों को अफगान से निकालने की प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरे होने का क्रेडिट आर्मी को देते हुए इसे सेना का अदम्य साहस बताया। इसके अलावा एक बार फिर से अफगान से सेना हटाने के अपने फैसले को सही किया।

उन्होंने कहा कि वह आगे अफगानिस्तान की मदद करते रहेंगे लेकिन यह आतंकवाद और हिंसा की कीमत पर नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये ऐलान कर दिया कि अफगानिस्तान में अमेरिका का मिशन अब खत्म हो चुका है।

Read More:

  1. मनचले युवक ने महिला पर रॉड से किया हमला, जानें कहाँ की है घटना
  2. बिहार- जमीन से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए जारी होगा यूनिक कोड
  3. राजद में फिर छिड़ा पोस्टर वार, बाहर आई ‘परिवार’ की तकरार
  4. सिद्धू ने फिर कैप्टन अमरिंदर के लिए जारी किया फरमान, क्या अब और बिगड़ेगी बात?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *