पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन सरकार द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में बुलाए गए एक दिवसीय विशेष सत्र पर सवाल खड़ा करते हुए ट्विटर पर तंज कसते हुए लिखा कि “प्रकाशोत्सव को समर्पित एक दिन के सत्र की वह तारीफ करते हैं लेकिन मुख्यमंत्री को सरबत के भले की विचारधारा को नहीं भूलना चाहिए।
सबका भला करने वाले मुद्दे हल किए जाने चाहिए।” उन्होंने कहा कि सरकार को महंगे बिजली समझौते रद्द करने के लिए कानून लाना चाहिए। सिद्धू ने बिजली का मुद्दा उठाते हुए सरकार को दिशा निर्देश दिए कि पंजाब सरकार राज्य द्वारा बिजली नियामक आयोग को आदेश जारी किए जाने चाहिए कि वह बिजली एक्ट- 2003 के तहत न्यूनतम दर पर बिजली की खरीद करे जिससे पंजाब सरकार को सीधे 50 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी।
वहीं, लोगों को तत्काल डेढ़ से 2 रुपये सस्ती बिजली मिलेगी। गौरतलब है कि सिद्धू ने इससे पहले निजी कंपनियों से किए बिजली समझौते रद्द करने और महंगी बिजली खरीदने के लिए निजी थर्मल प्लांटों को दिए जा रहे फिक्स्ड चार्ज की अदायगी तुरंत बंद करने का मुद्दा उठाया था।
कैप्टन को एसवाईएल नहर के टर्मिनेशन कानून की याद दिलाते हुए उसी तरह का सख्त कदम उठाते हुए सरकार ट्रांसमिशन ऑफ पीपीए एक्ट लाकर गलत बिजली समझौते सिरे से रद्द करने की सलाह भी सिद्धू ने दी। उन्होंने लिखा कि इस समय पंजाब में मुद्दों को भटकाने का सीजन चल रहा है लेकिन उनकी कोशिश है कि पंजाबियों को वापस मुद्दों पर लाया जाए।
उनके मुताबिक अगर ऐसा हो जाता है तो एससी-ओबीसी, बीपीएल और फ्रीडम फाइटर्स को 300 यूनिट मुफ्त बिजली के साथ अनारक्षित वर्ग के लोगों को भी यह सुविधा मुहैया कराई जा सकेगी।
इससे घरेलू उपभोक्ताओं को 3 रुपये प्रति यूनिट और औद्योगिक उपभोक्ताओं को 5 रुपये यूनिट बिजली देने का सपना भी साकार किया जा सकेगा। एक अन्य महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए सिद्धू ने लिखा कि पंजाब सरकार उन सभी लोगों के बिल माफ करे, जिन्हें बिना कारण ज्यादा बिल भेजे गए हैं। बता दें कि यह सारी बातें नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट करके लिखी हैं।
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