प्रधानमंत्री के कैबिनेट विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस पर चर्चा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ युवा चेहरों को इंट्री मिलने की संभावना है तो वहीं काम ठीक से न करने वाले मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है और कुछ मंत्रियों को उनके अच्छे कामकाज का इनाम भी मिल सकता है।
इसी के साथ विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र जातीय समीकरण भी साधे जाएंगे। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अपने मंत्रिमंडल का अंतिम विस्तार जल्द कर सकती है। विस्तारीकरण के तहत मंत्रियों की संख्या 5 से 6 हो सकती है।
ये तब होगा जब कोई भी पुराने मंत्री मंत्रिमंडल से बाहर नहीं होंगे और अगर 4-5 मंत्री मंत्रिमंडल से बाहर होते हैं तो ये संख्या 10 तक पहुंच सकती है। कहा यह भी जा रहा है कि संगठन से एक से दो लोगों को विस्तार में शामिल किया जा सकता है।
प्रदेश सरकार के 19 मार्च 2017 को गठन के बाद योगी सरकार ने 22 अगस्त 2019 को मंत्रिमंडल विस्तार किया था। उस दौरान उनके मंत्रिमंडल में 56 सदस्य थे। हालांकि,कोरोना के चलते तीन मंत्रियों का निधन हो चुका है- राज्यमंत्री विजय कुमार कश्यप, पहली लहर में मंत्री चेतन चौहान और मंत्री कमल रानी वरुण।
पहले मंत्रिमंडल विस्तार में 6 स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को कैबिनेट की शपथ दिलाई गई थी, इसमें तीन नए चेहरे भी थे। फिलहाल योगी मंत्रिमंडल में 23 कैबिनेट मंत्री, 9 स्वतंत्र प्रभार मंत्री और 22 राज्यमंत्री हैं, यानी मंत्रियों की संख्या कुल 54 है।
नियमों के मुताबिक, अभी 6 मंत्री पद खाली हैं। ऐसे में योगी सरकार अगर कैबिनेट से किसी भी मंत्री को नहीं हटाती है तो भी 6 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा के मानसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा। इसमें ओबीसी, ब्राह्रण के साथ ही अन्य जातियों को साधने की कोशिश हो सकती है।
जानकार मान रहे हैं कि ओबीसी वोट बैंक को साधे रखने के लिए पार्टी संजय निषाद के साथ ही बहुजन समाज पार्टी से खिन्न चल रहे एक राजभर नेता को साथ लेने पर विचार कर रही है। ओमप्रकाश राजभर की काट के लिए इस राजभर नेता के किसी परिजन को या तो एमएलसी बनाया जा सकता है या फिर मंत्रिमंडल में लेने का फैसला हो सकता है।
ब्राह्मण वोटों की दावेदारी के लिए ब्राह्मण चेहरे के रूप में जितिन प्रसाद को शामिल किया जा सकता है। वह हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए हैं।इसी के साथ भाजपा के सह संगठन मंत्री भवानी सिंह के स्थान पर संगठन के पुराने कार्यकर्ता को समाहित किया जा सकता है। वहीं संगठन में काम कर रहे एक दलित नेता की भी मंत्री पद के लिए दावेदारी की चर्चा है।
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