वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद की जमीन को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। इसी बीच मस्जिद की तरफ से एक बड़ी पहल की गई है और मंदिर के कॉरिडॉर के लिए 1700 स्क्वायर फीट की जमीन दी गई।

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मंदिर प्रशासन को ज्ञानवापी मस्जिद से सटी जमीन देने का फैसला किया है जिसके बाद अब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लिए 1700 स्कवायर फीट जमीन मिल गई है।

इसे लेकर ज्ञानव्यापी मस्जिद के केयरटेकर और अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद के संयुक्त सचिव एस.एम.यासीन ने बताया कि ” जो प्लॉट दिया गया है, वह मस्जिद से जुड़ा हुआ नहीं है। वह अलग है। ज्ञानव्यापी मस्जिद समिति के तहत तीन प्लॉट हैं, जो वक्फ की प्रॉपर्टी हैं।

इनमें से एक में मस्जिद है। दूसरे प्लॉट में दोनों धर्मस्थलों के बीच का कॉमन पैसेज (सामान्य रास्ता) है, जबकि तीसरा प्लॉट जिला प्रशासन को बाबरी विध्वंस के एक साल बाद दोनों धर्मस्थलों की सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम बनाने के उद्देश्य से दिया गया था। उसी में से एक प्लॉट पर कंट्रोल रूम बना था जिसको लेकर हमने सुन्नी वक्फ बोर्ड से बात की।

वहां से परमिशन मिलने के बाद मंडलायुक्त से बात करके समन्वय बनाया। जिसके बाद हमने कॉरिडोर के निर्माण में करीब 1700 स्क्वायर फीट जमीन देने का फैसला किया। इसके बदले में हमें परिसर के बाहर 1000 वर्ग फीट की जमीन मिली है।” मौके पर जो पुलिस कंट्रोल रूम था, उसे प्रोजेक्ट के लिए अब ढहा दिया जा चुका है।

इस संपत्ति का आर्टिकल 31 के एक्‍सचेंज ऑफ प्रॉपर्टी के तहत जारी दस्‍तावेजों में ई-स्‍टांप के जरिए हस्‍तांतरण किया गया है। मस्जिद से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मस्जिद द्वारा दी गई जमीन पहले प्रशासन को एक स्थायी पट्टे पर दी गई थी।

बाबरी मस्जिद के विध्वंस के मद्देनजर वहां पुलिस नियंत्रण कक्ष बनाया जाना है। बताया गया कि ट्रस्ट ने इसे काफी साल पहले मंदिर से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए मांगा था। मस्जिद परिसर से लगभग 15 मीटर की दूरी पर स्थित यह भूखंड आकार में बड़ा है, पर इसके लिए बदली गई जमीन के मूल्य के बराबर है।

वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूखी ने बताया कि ट्रस्ट को दी गई भूमि कर्मशियल थी और अधिक मूल्य की थी। अफसरों ने हमसे उसके बारे में पूछा था, क्योंकि उसकी जरूरत काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए थी।

वहीं, काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर सुनील वर्मा ने कहा, ” जमीन का मस्जिद से कोई लेना देना नहीं है, क्योंकि यह जमीन नहीं खरीदी जा सकती क्योंकि यह वक्फ की संपत्ति है। हमने उसे वैल्यू के आधार पर एक्सजेंच किया है। मस्जिद को जो जमीन दी गई है, वह अब तक श्री काशी विश्वनाथ स्पेशल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के तहत आती थी।”

इस फैसले के बाद अब कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में कोई रुकावट नहीं होगी। बता दें कि ये जमीन ज्ञानवापी मस्जिद से सटी हुई है। इसपर मंदिर प्रशासन का कंट्रोल रूम बना हुआ है लेकिन अब इसे स्थानांतरित किया जाएगा।

हालांकि पहले ही ये जमीन प्रशासन के पास थी, लेकिन इस पर कॉरिडोर का काम आगे बढ़ाने के लिए कानूनी तौर पर मस्जिद पक्ष की स्वीकृति चाहिए थी। अब स्वीकृति मिलने और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉरिडोर को और भी भव्य रूप मिलेगा। वाराणसी में प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का 60% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है जिसमें सैकड़ों मजदूर लगातार काम में लगे हुए हैं।

4.30 सौ करोड़ से भी ज्यादा की लागत से बनाया जाने वाला यह कॉरिडोर अपने आप में अद्भुत है जिसका निर्माण काम नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 300 से ज्यादा घरों का अधिग्रहण किया गया है।

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