महाराष्ट्र में नारायण राणे द्वारा विवादित बयान देने के बाद शिवसेना ने अब आक्रामक रूप धारण कर लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ राणे के विवादित बयान के बाद अब राज्य भर में शिवसैनिकों ने तीव्र विरोध जताना शुरू कर दिया है जो अब हिंसा का रूप लेता हुआ नजर आ रहा है।
नाशिक शहर में शिवसैनिकों ने भाजपा कार्यालय पर पत्थरबाजी की है जिसमें कार्यालय का कांच टूट गया।
वहीं नारायण राणे के मुंबई के जुहू स्थित बंगले पर भी शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने धावा बोलने की चेतावनी दी है जिसके मद्देनजर मुंबई पुलिस ने बंगले के इर्द-गिर्द पहरा कड़ा कर दिया है।
उधर राणे के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ता भी उनके बंगले पर जुटना शुरू हो चुके हैं। मंत्री के बयान के बाद से महाराष्ट्र की सियासत में कोहराम मचा हुआ है जिसकी वजह से राज्य में कानून व्यवस्था के भी बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
एक तरफ जहां मुंबई के बंगले पर शिवसेना और भाजपा के कार्यकर्ता आमने-सामने आ सकते हैं तो वहीं दूसरी तरफ चिपलुन शहर में मंत्री राणे अपनी जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल परब ने कई शिवसेना नेताओं को चिपलुन में मीटिंग के लिए बुलाया है और जिस रिसॉर्ट में नारायण राणे रुके हुए हैं उसी जगह पर अनिल परब और तमाम शिवसेना विधायकों के लिए भी कमरे बुक हैं।
ऐसे में आशंका है कि चिपलुन में हालात बिगड़ सकते हैं। पुलिस प्रशासन को मुस्तैदी दिखाने और एहतियाती कदम उठाने के लिए कहा गया है।
विवादित बयान का मामला यह है कि मंत्री नारायण राणे महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं। पिछले दिनों उनकी यात्रा रायगढ़ के महाड पहुंची जहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लेकर कहा कि “यह कैसा मुख्यमंत्री है जिसको अपने देश का स्वतंत्रता दिवस पता नहीं। मैं वहां होता तो कान के नीचे थप्पड़ लगा देता।”
राणे के इसी बयान पर मचे घमासान के बाद शिवसेना हमलावर हो गई है। शिवसेना से लोकसभा सांसद विनायक राउत ने प्रधानमंत्री को खत लिखकर राणे को तत्काल रूप से केंद्रीय मंत्री पद से हटाने की मांग की।
राउत ने अपने पत्र में लिखा कि “राणे ने पत्रकार परिषद में राज्य के मुख्यमंत्री के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया वह बेहद निदंनीय है। नारायण राणे जैसा अपनी मर्यादा भूलने वाला केंद्रीय मंत्री ऐसी भाषा का उपयोग करता है तो मुझे लगता है कि उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।”
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