ममता का डर या प्रशांत किशोर की रणनीति? क्या है बंगाल का ‘नंदीग्राम’ प्लान

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों को लेकर अब कुछ महीने और दिनो का वक़्त शेष है। पिछले एक दशक से बंगाल की राजनीति में एकछत्र राज करने वाली ममता के सामने अपना किला और साख बचाने की चुनौती है वहीं बीजेपी के पास मिशन बंगाल के लिए उचित अवसर और ब्रांड मोदी का सहारा है।

इन सब के बीच जहां एक तरफ बीजेपी बंगाल में शाह और नड्डा के अलावा शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष जैसे नेताओं के भरोसे चुनावी वैतरणी पार करने की फिराक में है वहीं आज ममता ने शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का एलान कर अपना ट्रम्प कार्ड चल दिया है। हालांकि ममता के इस एलान के कुछ देर बाद ही शुभेंदु ने यह कह राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया कि अगर नंदीग्राम में वह ममता को न हरा सके तो राजनीति से सन्यास ले लेंगे।

बंगाल में बीजेपी बहुत हद तक शुभेंदु के भरोसे है ऐसे में ममता का यह दांव मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है साथ ही इसे ममता का चुनावी बागडोर संभाल रहे प्रशांत किशोर की अग्नि परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकारों की माने तो अभी तक प्रशांत और ममता के माथे पर चिंता की एक लकीर बीजेपी की तरफ से खींची जा चुकी है। शुभेंदु के आने के बाद यह लकीर और गहरी हुई है। यही वजह है कि ममता को खुद नंदीग्राम में मोर्चा सम्भालना पड़ा है।

कुल मिलाकर देखें तो।खबर यह भी है कि पत्थरबाजी और अराजक माहौल बना टीएमसी मानसिक दबाव बनाने की कोशिश में विफल हो चुकी है और अब आखिरी कुछ दांव चुनावों के एलान से पहले चलकर मानसिक बढ़त लेने की कोशिश में है। हालांकि देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस अभिरक्षा में प्रचार करने वाली प्रशांत की टीम ममता के किले को बचाने में किस हद तक सफल हो पाती है। 

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