यूपी चुनाव का दूसरा चरण ,अब तक 39.07% मतदान हुए दोपहर 1 बजे तक ,मोदी का नारा ‘परिवारवाद’ जाने आगे! 

उत्तर प्रदेश चुनाव के दूसरे चरण में सोमवार, 14 फरवरी को मतदान के साथ, राज्य में नौ जिलों और 55 निर्वाचन क्षेत्रों में दोपहर 1 बजे तक 39.07 प्रतिशत मतदान हुआ। जैसे ही मतदान चल रहा था, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर देहात में एक रैली को संबोधित किया और कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि “परिवारवाद” को यूपी की सत्ता में वापस नहीं लाया जाएगा।

मायावती ने समाजवादी पार्टी पर कसा तंज, छोटे राजनीतिक दलों को साथ लाने को बताई मजबूरी

अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी (सपा) के छोटे दलों के साथ गठबंधन की बात जारी करने के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती ने निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के दलित विरोधी और काम करने के तरीकों को देखते हुए बड़ी पार्टियों ने उनसे पहले ही किनारा कर लिया है।

ममता का डर या प्रशांत किशोर की रणनीति? क्या है बंगाल का ‘नंदीग्राम’ प्लान

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों को लेकर अब कुछ महीने और दिनो का वक़्त शेष है। पिछले एक दशक से बंगाल की राजनीति में एकछत्र राज करने वाली ममता के सामने अपना किला और साख बचाने की चुनौती है वहीं बीजेपी के पास मिशन बंगाल के लिए उचित अवसर और ब्रांड मोदी का सहारा है।

दिसंबर जाते-जाते 2019 से पहले बीजेपी या कांग्रेस किसको गम और किसको खुशी देगा, पढ़ें

बीजेपी और कांग्रेस दोनो के लिए यह चुनाव नाक का सवाल थे। 2019 से पहले इसे सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इन चुनावों में सत्ता विरोधी लहर के हावी होने की संभावना प्रबल थी। यह नजर भी अब आ रही है।

एक ऐसा इंटरव्यू जिसने राजनीतिक गलियारों में मचाया तूफान, गठबंधन पस्त, बीजेपी मस्त

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस-बसपा गठबंधन की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है वहीं बीजेपी को अप्रत्यक्ष तौर पर फौरी राहत भी दे दी है।

एकजुट विपक्ष के लिए ममता-सोनिया का मोदी के खिलाफ यह आखिरी दांव,पढ़ें

यह दांव है बिना पीएम उम्मीदवार या चेहरे के चुनाव लड़ना। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद यह सामने आया है कि विपक्ष चुनाव बिना किसी चेहरे पर लड़ेगा।

राजनीति के आधुनिक चाणक्य द्वारा कराए जा रहे सर्वे की मानें तो फिर पीएम बनेंगे मोदी, पढ़ें

भारत की राजनीति में यह साल काफी गहमागहमी भरा है। कांग्रेस जहां राहुल और क्षेत्रीय दलों के गठबंधन भरोसे 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी वैतरणी पार लगाने की तैयारी में लगी है वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे भरोसे एनडीए भी जीत का ख्वाब देखती और सपने बुनती नजर आ रही है।

राहुल की राह में कई बाधाएं हैं, पढ़ें कुछ खास

राहुल के सामने सबसे बड़ी बाधा पार्टी पर लगे भ्र्ष्टाचार के कलंक को मिटाना न सही लेकिन यह भरोसा दिलाना है कि यह कांग्रेस नई है, इसकी सोच नई है।

अगर ऐसा हुआ तो सबसे ज्यादा सीटें जीतकर भी कर्नाटक में सरकार नही बना पायेगी बीजेपी

कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर का गठबंधन अगर आने वाले भविष्य में जमीनी हकीकत बना तो शाह को सोचने की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो खुद बीजेपी के आंतरिक सर्वे में बीजेपी बहुमत से दूर दिख रही है।

राहुल के सामने बतौर अध्यक्ष हैं यह बड़ी चुनौतियां, इनसे पार पा गए तो मोदी पर पड़ेंगे भारी

राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की छवि के साथ अपनी छवि को सुधारना है। कार्यशैली में बदलाव लाना है क्योंकि कांग्रेस आज भी नेहरू इंदिरा वाली कांग्रेस है इसमें कुछ भी नयापन नजर नही आता।

गूगल प्लस और यूट्यूब पर भी मोदी की धूम, राहुल मौजूद नही

पीएम मोदी और राहुल गांधी यूट्यूब और गूगल प्लस पर हैं या नही और अगर हैं तो उन्हें कितने लोग देखते हैं, सुनते हैं और फॉलो के साथ सब्सक्राइब भी करते हैं?

जब माणिक और मनमोहन की सरकार नही बची, तो कुछ भी सम्भव

राजनीति में एक व्यक्ति की ईमानदारी से फर्क नही पड़ता लेकिन एक व्यक्ति की बेईमानी का खामियाजा पूरे दल को भुगतना पड़ता है। इसके दो उदाहरण हैं।

दिल्ली के बाद मुम्बई में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन, कांग्रेस ने दिया समर्थन

रेलवे में नौकरी देने की मांग को लेकर मुम्बई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन की पटरियों पर उतर आए हैं। इन छात्रों की मांग है कि इन्हें अप्रेंटिस की जॉब दी जाए।

चुनावी चक्रव्यूह तीनों तरफ से है लेकिन फंसेगा कौन?

राजनीति के महारथी अभी से अपने अपने दायरे बनाने में और दूसरों के लिए चक्रव्यूह की रचना करने में लगे हैं। हर तरफ से अपने मुताबिक एक परिधि बनाई जा रही है ताकि खुद को सुरक्षित रख कर दूसरों का मुकाबला किया जा सके। यह परिधि कुछ और नही मुद्दे हैं।

प्रशांत किशोर की मोदी से मुलाकात, क्या फिर संभालेंगे प्रचार की कमान?

प्रशांत किशोर ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने बीजेपी के प्रचार की कमान संभाल रखी थी और ब्रांड मोदी की सुनामी पूरे देश मे खड़ी कर दी थी। अब प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा में होने की वजह कुछ दिनों पहले पीएम से हुई उनकी मुलाकात है।