अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी (सपा) के छोटे दलों के साथ गठबंधन की बात जारी करने के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती ने निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के दलित विरोधी और काम करने के तरीकों को देखते हुए बड़ी पार्टियों ने उनसे पहले ही किनारा कर लिया है।
ट्वीटों के जरिए बसपा अध्यक्ष ने समाजवादी पार्टी को लाचार बताते हुए छोटे राजनीतिक दलों द्वारा सहायता लेकर प्रदेश में चुनाव लड़ने की बात कही। मायावती ने कहा कि “समाजवादी पार्टी के घोर स्वार्थी, संकीर्ण और दलित विरोधी एवं कार्यशैली के कड़वे अनुभवों के भचक्तभोगी होने के बाद सभी बड़ी पार्टियां इनसे दूर ही रहना चाहती हैं। पार्टी, छोटे राजनीतिक दलों का साथ लेकर, आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में लड़ने के लिए मजबूर है।”
वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव इस विधानसभा चुनाव में जीतने को लेकर विश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा है कि 2022 का यह विधानसभा चुनाव प्रदेश में लोकतंत्र की क्रांति लेकर आएगा। समाजवादी पार्टी ने इस बार के चुनावों में छोटे राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने की बात कही है।
ज्ञात हो कि सपा और बसपा 2019 के चुनावों में भाजपा के विरुद्ध एक साथ खड़े हुए थे। हालांकि उन चुनावों में जहां बसपा सिर्फ दस सीटें, वहीं सपा केवल पांच सीटें पा सकी थी। इस हार के एक महीने बाद ही मायावती नया ऐलान किया था कि सपा और बसपा अब एक साथ कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे क्योंकि सपा के नेताओं के रुख को देखते हुए शायद अब निकट भविष्य में उनमें भाजपा को हराने की शक्ति नहीं है। 2022 के इस विधानसभा चुनाव में बसपा अकेले ही मैदान में उतरेगी।
