बिहार इन दिनों चुनावी माहौल में मग्न है। हर तरफ उम्मीदवार, दल, गठबंधन और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। चुनावी रैलियां हो रहीं हैं और इन सब के बीच वैश्विक महामारी कोरोना और इसका प्रभाव सब बीती बात बन चुके हैं।
अब किसी को न आंकड़ों में दिलचस्पी है न अस्पताल की व्यवस्था में। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि तमाम नियमों को नजरअंदाज कर चुनावी रैलियों में भीड़ जुटाई जा रही।
मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग अब बंद हो चुका है। इसके साथ ही बंद हो चुकी है अस्पतालों में कोरोना को लेकर शुरु हुई सुविधा।
ऐसा इसलिए है क्योंकि जब पटना से बिहार के प्रधान सचिव ने भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल में बने कोविड कंट्रोल रूम में फ़ोन किया तो जवाब सुन हैरान रह गए।
हालांकि इस फ़ोन का असर यह जरूर हुआ कि अस्पताल में बदइंतजामी की कलई खुल गई। जब मुख्य सचिव ने कोविड कंट्रोल रूम फ़ोन किया और अपना परिचय दिया तो वहां मौजूद कर्मचारी ने कहा कि वह किसी प्रधान सचिव को नही जानते हैं। हर कोई अधिकारी ही बनता है। यह कहते हुए कर्मचारी ने फ़ोन काट दिया।
इसके बाद मुख्य सचिव ने एक बड़े अधिकारी को फ़ोन मिलाया और इसके बाद आनन फानन में जिले के सीएस अस्पताल पहुंचे। उन्हें अस्पताल की व्यवस्था में सुधार लाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ हेमंत कुमार सिन्हा ने कहा कि कंट्रोल रूम का संचालन जिला प्रशासन स्तर से होता है। इसमें हम लोगों को कोई रोल नहीं है।
