बिहार विधानसभा चुनावों में अब नामांकन और प्रचार जोर पकड़ने लगा है। अभी तक गठबंधन, सीट और उम्मीदवारों में उलझे दल और नेता अब धीरे-धीरे अपने क्षेत्र में पहुंचने लगे हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है।
हालांकि इन सब के बीच बिहार के कई विधानसभा सीटों से मौजूदा विधायक और मंत्रियों को जनता का भारी विरोध भी झेलना पड़ रहा है। जनता में इनको लेकर गुस्सा इनकी कार्यशैली की वजह से है। कई जगह तो नेताओं पर यह आरोप है कि 2015 में जीतने के बाद वह अब 2020 के विधानसभा चुनावों में ही अपने क्षेत्र पहुंचे हैं।
ऐसे ही कई मामले हाल के दिनों में दिखे। अभी कुछ दिनों पहले जदयू के नेता और मंत्री कृष्णनंदन वर्मा को जनता का भारी विरोध अपने ही क्षेत्र में झेलना पड़ा। इसके बाद पश्चिमी चंपारण के रामनगर सुरक्षित सीट से बीजेपी विधायक को भी जनता के गुस्से से दो चार होना पड़ा।
जनता जानना चाह रही थी कि पिछले पांच सालों में उन्होंने क्षेत्र के लिए क्या किया और उनकी उपलब्धि क्या रही? इसका जवाब वह नही दे पाईं। इन दोनों नेताओं के विरोध का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है।
अब ऐसा ही विरोध छपरा के नैनी गांव में क्षेत्र के स्थानीय विधायक को झेलना पड़ा। वर्तमान विधायक सीएन गुप्ता को बीजेपी ने फिर अपना उम्मीदवार बनाया है। इसी क्रम में वह जनसमर्थन जुटाने पहुंचे थे लेकिन जनता पहले से ही विधायक जी को आईना दिखाने के मूड से बैठी थी।
लोगों ने विधायक का नाम लेकर मुर्दाबाद के नारे लगाए और विरोध की तख्ती भी दिखाई। स्थानीय वोटर्स इस बात को लेकर गुस्से में थे कि पूरे 5 साल में उन्होंने कभी इस गांव में आना जरूरी नहीं समझा, न ही किसी काम में कोई दिलचस्पी दिखाई।
अब देखना है विरोध झेल रहे विधायक नतीजों के बाद विधायक बनेंगे या पूर्व विधायक का तमगा ही हासिल कर सकेंगे।
