उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की करीब आती तारीखों के साथ सभी पार्टियां अपने-अपने वोट बैंक साधने की कोशिश में जुटती जा रही हैं। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने पंडितों को अपने पाले में करने के लिए ब्राह्मण सम्मेलन की शुरुआत की है।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा, इसी कोशिश के तहत प्रदेश के 13 प्रतिशत ब्राह्मण और 23 प्रतिशत दलित के साथ मिलकर भाजपा की योगी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने की बात कह रहे हैं।
सतीश मिश्रा ने मंगलवार को कौशाम्बी में ओसा स्थित पार्टी कार्यालय में प्रबुद्ध जनों के सम्मान में आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि “उनके शासनकाल में ब्राह्मणों और दलितों का उत्पीड़न हुआ है, भाजपा सनातन धर्म को ही खत्म करना चाहती है इसीलिए सैकड़ों संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों को बंद कर दिया गया है।
जो चल रहे हैं, उनमें शिक्षकों की तैनाती नहीं की जा रही। संस्कृत विद्यालयों को मठों तक सीमित किया जा रहा है। ताकि ब्राह्मणों के बच्चे संस्कृत की शिक्षा से दूर हो जाएं। संस्कृत की पढ़ाई करने वालों को इसी उद्देश्य से सरकारी नौकरी भी नहीं दी जा रही है।”
यहां पर उन्होंने सपा को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि सपा सरकार में कन्नौज से नीरज मिश्र का सिर कटवाकर लखनऊ तक लाया जाना ब्राह्मण नहीं भूल पाए हैं।
सांसद मिश्रा ने बसपा के शासनकाल में बतौर मुख्यमंत्री मायावती द्वारा भारी संख्या में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां ब्राह्मणों को देकर उनके सम्मान को बढ़ाए जाने की बात याद दिलाई। उन्होंने अपने संबोधन में कुल मिलाकर ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की।
मिश्रा ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में बसपा किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने छोटे और बड़े सभी दलों से गठबंधन की बात को खारिज करते हुए खासकर असदउ्दीन ओवैसी की पार्टी संग मिलकर लड़ने की बात को सिरे से नकार दिया।
उन्होंने बसपा के गठबंधन के खराब अनुभव का जिक्र करते हुए सपा से समझौते की बात को पार्टी द्वारा याद भी नहीं किए जाने की बात कही। ज्ञात हो कि गठबंधन से जुड़ी यह सारी बातें बसपा प्रमुख मायावती पहले ही साफ कर चुकी है।
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