विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित होने को लेकर सभापति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को सदन में दिन पर दिन असहाय होते जाने पर चिंता जताई।

गौरतलब है कि पेगासस जासूसी, तीन कृषि कानूनों सहित विभिन्न मुद्दों पर सदन में लगातार हंगामा होने की वजह से संसद के मानसून सत्र की पिछले सप्ताह शुरूआत होने के बाद से अब तक, कोविड महामारी के प्रबंधन पर चार घंटे की चर्चा के अलावा अन्य कोई कामकाज नहीं हो पाया है।

मंगलवार को भी दोनों सदनों में विपक्ष के सदस्‍यों की ओर से हंगामा किया गया, इसके कारण कई बार कार्यवाही स्‍थगित करने की नौबत आई और आज भी हंगामे की वजह से उच्च सदन की कार्यवाही बाधित हुई और शून्यकाल नहीं चल पाया।

राज्‍यसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शुरू होने के बाद सदस्‍यों ने जमकर हंगामा-नारेबाजी की जिसके कारण बार-बार कार्यवाही स्‍थगित करनी पड़ी। राज्‍यसभा सभापति ने सदस्‍यों के इस तरह के व्‍यवहार पर नाराजगी जताई है।

उन्होंने शून्यकाल और विशेष उल्लेख के जरिये उठाये जाने वाले उन मुद्दों का उल्लेख किया जिन्हें आसन की ओर से सदन में उठाने की अनुमति दी गयी थी तथा संबंधित सदस्य भी सदन में उपस्थित थे किंतु चल रहे हंगामे के कारण उन मुद्दों को नहीं उठाया जा सका और कहा कि ‘‘सदन में कामकाज नहीं हो पा रहा है… सदस्यों को अवसर नहीं मिल पा रहा है।”

उन्होंने कहा ‘‘हम असहाय हो रहे हैं। लोगों को पता चलना चाहिए कि कौन-कौन से महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने की मंजूरी दी गई है। सदस्य मौजूद हैं, वे अपनी बात कहना चाहते हैं लेकिन कुछ लोग उन्हें बोलने नहीं दे रहे हैं।”

राज्‍यसभा सचिवालय के अनुसार, सभापति ने सदन में ड्रामेबाजी को लेकर अफसोस जताया और कहा कि व्‍यवधान से देश और सदन के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। नायडू ने जोर देकर कहा कि सदन, एक वर्ग के दबाव में काम नहीं करेगा। उन्‍होंने हंगामा कर रहे सांसदों को अपने इस रवैये को लेकर पुनर्विचार और आत्‍मनिरीक्षण करने की भी अपील की।

नायडू ने कहा, “मैं मीडिया में आई उन रिपोर्ट से चिंतित हूं कि एक वर्ग, सदन के शेष सत्र में भी कार्यवाही नहीं चलने देने को लेकर अडिग है। आप सभी को आत्‍मनिरीक्षण करना चाहिए।”  सभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से सदन,शून्यकाल चलने देने का आग्रह किया और इस तरह विरोध करने को उचित नहीं बताया।

इसके बाद शोरगुल जारी रहने पर उन्होंने अप्रसन्नता जताई और कहा कि सदस्यों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और इस हंगामे से अन्य चीजों के अलावा देशहित को भी नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि इन सब अपीलों के बावजूद सदन में व्यवस्था नहीं बनी और कार्यवाही स्‍थगित करनी पड़ी।

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