बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर अब चुनाव प्रचार चरम पर है। दलों के शीर्ष नेताओं और स्टार प्रचारकों ने अपने उम्मीदवारों के लिए मोर्चा संभाल रखा है। वर्चुअल से लेकर जमीनी स्तर तक, सड़क से लेकर सोशल मीडिया पर कोई कसर नही छोड़ी जा रही। इसके अलावा टेली मार्केटिंग कम्पनीज, मीडिया पीआर एजेंसी सहित बल्क टेक्स्ट मैसेज के सहारे भी दल और उम्मीदवार ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हैं।
ऐसे में एक नाम जो सहसा ही दिमाग मे कौंधता है वह नाम है प्रशांत किशोर का। कभी मोदी के करीबी तो कभी उनके धुर विरोधी और नीतीश के करीबी जा बने प्रशांत इन दिनों किसी खास भूमिका या पर्दे के सामने तो नजर नही आ रहे लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि नीतीश से अलग होकर ‘बात बिहार की’ शुरू करने वाले इस चुनावी परिदृश्य से पूरी तरह ओझल हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक गलियारों में उनको लेकर कई तरह की चर्चा है। कुछ रेपर्ट्स में जहां यह कहा गया कि प्रशांत लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान को इन दिनों सलाह दे रहे तो कहीं यह कहा गया कि तेजस्वी भी प्रशांत के टच में हैं और उन्ही की सलाह पर राजद के पोस्टर से लालू-राबड़ी की तस्वीर हटाई गई है। खास बात यह है कि पोस्टर पर क्रिएटिविटी और रंगों का प्रयोग 2015 में बिहार में बहार हो नीतीशे कुमार हो पीले लाल चटक रंगों के पोस्टर की याद दिलाता है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी दल ने न तो अभी तक प्रशांत की भूमिका स्वीकार की है न ही वह बिहार विधानसभा चुनावों में खुल कर किसी के पक्ष में दिखे हैं। हां यह जरूर है कि वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अलग-अलग दलों के साथ काम कर रहे। प्रशांत किशोर की कंपनी आइपैक ने आधिकारिक तौर पर पटना के आफिस भी चुनावों से पहले बंद कर दिया था। ऐसे में प्रशांत पर्दे के पीछे से किसके साथ हैं और इसका कितना नुकसान जदयू-बीजेपी को होगा या किसे फायदा होगा यह तो वक़्त बताएगा।
कुल मिलाकर प्रशांत के पास तेजस्वी और चिराग जैसे दो युवा नेताओं को गाइड करने की अपनी वजह भी है। एक तो जदयू से मिले ‘अपमान’ का बदला और दूसरा बिहार की राजनीति में बात बिहार की अकेले उनके वश से बाहर की बात रही हो यह भी एक वजह है। वह अच्छी तरह समझते हैं कि बिहार में अब बदलाव युवा ही लाएंगे ऐसे में अगर वह पर्दे के पीछे किसी के साथ हों भी तो इसमें हैरानी भरा कुछ नही क्योंकि एक नीतीश के साथ को छोड़ दें तो प्रशांत लाइम लाइट से दूर रहते हुए ही अपना काम करते रहे हैं और अंदाज़ा ही लगाया जाता रहा है।
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