ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने आज प्रशांत किशोर के संगठन के साथ किसी भी तरह की दरार से इनकार किया, उनके सहयोग में टूटने की हालिया रिपोर्टों को निराधार बताया। तृणमूल ने कहा कि दोनों “एक टीम” के रूप में काम करते हैं और ऐसा करते रहेंगे।
उत्तर प्रदेश में होने वाले अगले साल के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासत तेज होती दिखाई दे रही है। मैदान में खड़ी पार्टियां कई तरह के ऐलान कर चुके हैं, जैसे जहां बसपा बिना किसी गठबंधन के अकेले मैदान में उतरने का ऐलान कर चुकी है, वहीं एआईएमआईएम 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
कभी मोदी के करीबी तो कभी उनके धुर विरोधी और नीतीश के करीबी जा बने प्रशांत इन दिनों किसी खास भूमिका या पर्दे के सामने तो नजर नही आ रहे लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि नीतीश से अलग होकर ‘बात बिहार की’ शुरू करने वाले इस चुनावी परिदृश्य से पूरी तरह ओझल हैं?
सोशल मीडिया को एक बड़ा हथियार बनाया गया और इसके पीछे भी टैब के सीएम और अभी के पीएम मोदी का दिमाग था।उनके प्रचार का जिम्मा बेशक प्रशांत किशोर के पास था लेकिन यह फार्मूला कारगर रहा और बीजेपी सत्ता में आई। यहीं से शुरू हुआ भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया का प्रभुत्व।
प्रशांत किशोर ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने बीजेपी के प्रचार की कमान संभाल रखी थी और ब्रांड मोदी की सुनामी पूरे देश मे खड़ी कर दी थी। अब प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा में होने की वजह कुछ दिनों पहले पीएम से हुई उनकी मुलाकात है।
राहुल के लिए कांग्रेस की भ्रष्टाचार वाली छवि से उबरना भी मुश्किल नजर आता है वहीँ बीजेपी और केंद्र की मोदी सरकार के किसी भी मंत्री के खिलाफ ऐसा कोई आरोप नहीं है