कभी मोदी के करीबी तो कभी उनके धुर विरोधी और नीतीश के करीबी जा बने प्रशांत इन दिनों किसी खास भूमिका या पर्दे के सामने तो नजर नही आ रहे लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि नीतीश से अलग होकर ‘बात बिहार की’ शुरू करने वाले इस चुनावी परिदृश्य से पूरी तरह ओझल हैं?