बिहार में जैसे-जैसे चुनाव की सरगर्मियां तेज़ होती जा रही है वैसे-वैसे ही नेताओं का एक पाले से दूसरे पाले में जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. NDA के पुराने साथी और आरएलएसपी के कद्दावर नेता उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन को छोड़ फिर से NDA में शामिल होने की बात सामने आयी है.
आरएलएसपी के NDA में शामिल होने को लेकर जब मीडिया ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा “हम महागठबंधन में ऑल इज वेल चाहते हैं. लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है. राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता. हम पहले भी एनडीए में रह चुके हैं. लेकिन प्राथमिकता महागठबंधन की एकजुटता है.” माधव आनंद के इस बयान ने इस बात को और भी हवा दे दी है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो RLSP की NDA में वापसी को लेकर बीजेपी से बात भी हो चुकी है मगर मुख्यमंत्री नितीश कुमार की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलना अभी बाकी है.
आपको बतादें की 2015 का विधानसभा चुनाव RLSP ने NDA के साथ मिलकर लड़ा था. मगर मुख्यमंत्री नितीश कुमार से लगातर जारी तल्खी और लोकसभा में सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद के चलते उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन का हाथ थाम लिया था. कुशवाहा ने ‘सुशाशन बाबू’ के काम करने के तरीके पर जमकर जवाल उठाये थे.
इससे पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी भी NDA की चुनावी नइया में सवार हो चुके है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बात की पूरी सम्भावना है की अगले हफ्ते चुनाव आयोग बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर सकती है.
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