बिहार में बाढ़ के कहर को देखते हुए या अंदाजा लगाया जा रहा है कि पंचायत चुनाव फिर से टल सकते हैं। भयावह बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ऐसी चर्चाएं शुरू हुई हैं।
राज्य में पंचायत चुनाव के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से लगातार तैयारी जारी है।
आयोग ने पिछले दिनों पंचायतीराज विभाग को पंचायत और ग्राम कचहरियों के चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी करने के संबंध में अपनी अनुशंसा भी भेज दी थी।
स्टेट इलेक्शन कमिशन की अनुशंसा के बाद ये उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द ही मुख्यमंत्री की मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद पंचायत चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी हो सकती है।
हालांकि, अब बाढ़ के हालात को देखते हुए इसमें बदलाव की संभावना जताई जा रही है। ऐसा माना जा रहा कि पंचायत चुनाव को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले प्रदेश सरकार सभी जिलों के डीएम से बात करेगी कि बाढ़ की क्या स्थिति है।
ऐसे में कोई भी फैसला जिलाधिकारियों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। दूसरी ओर राज्य निर्वाचन आयोग भी पंचायत चुनाव के संबंध में जिला प्रशासन से जरूरी तैयारियों की जानकारी लेने में जुटा हुआ है।
मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसी संभावना जताई जा रही कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में पंचायत चुनाव की तारीखें आगे बढ़ सकती हैं। ऐसा भी कहा जा रहा कि पंचायत चुनाव को लेकर आयोग की ओर से सुझाए गए कार्यक्रम में कुछ बदलाव किया जाए जिससे पूरे चुनाव कार्यक्रम पर असर पड़े।
पंचायत चुनाव की तारीखें कुछ इस प्रकार हैं कि पहले चरण का मतदान 20 सितंबर, दूसरा चरण 24 सितंबर, तीसरा चरण 4 अक्टूबर, चौथा चरण 8 अक्टूबर, पांचवां चरण 18 अक्टूबर, छठा चरण 22 अक्टूबर, सातवां चरण 31 अक्टूबर, आठवां चरण 7 नवंबर, नौवां चरण 15 नवंबर और दसवें चरण का मतदान 25 नवंबर को होना संभावित हुआ है।
हालांकि, यह भी है कि इसपर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आयोग ने अब तक जो तैयारी की है, उसमें भी बाढ़ के संभावित असर वाले प्रखंडों में बाद के चरणों में चुनाव कराने की ही बात है।
हालांकि जब आयाेग द्वारा जिलों से रिपोर्ट के आधार पर यह कार्यक्रम तय किया गया था तब बाढ़ इतने खतरनाक स्तर पर नहीं पहुंचा था।
बता दें कि कई इलाकों में बाढ़ का पानी अनुमान से कही अधिक है। करीब 14 साल बाद भागलपुर-किऊल रेलखंड पर बाढ़ के कारण यातायात बंद करना पड़ा।
पटना के पास गंगा रिकार्ड स्तर तक पहुंचने से कुछ ही सेंटीमीटर नीचे है तो दूसरी तरफ गंगा के अलावा गंडक और कोसी जैसी नदियों में अब भी काफी पानी है।
हथीदह और कई इलाकों में गंगा पुराने रिकॉर्ड तोड़ चुकी है।
Read More
- अगले कुछ दिनों में भारत में लॉंच होने वाले हैं यह स्मार्टफोन, देखें
- अमेरिकी सेना की मौजूदगी में फिर खुला काबुल एयरपोर्ट, रेस्क्यू ऑपेरशन हुआ शुरू
- अफगानिस्तान में बिगड़े हालात तो भारत में ड्राई फ्रूट मार्केट पर बड़ा असर, जानें
- मायावती का दावा- बसपा के प्रबुद्ध सम्मेलन ने उड़ाई बीजेपी की नींद
- इंदिरा गांधी और प्रधानमंत्री मोदी के सवाल पर अजय देवगन ने कुछ इस प्रकार दिया जवाब
