अफगानिस्तान पर तालिबान कब्जा हो चुका है और राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग चुके है। कट्टरपंथी तालिबान के इस कब्जे से अफगानिस्तान क्राइसिस की वजह से भारतीय मेवा बाजारों पर भी असर दिखने लगा है।

व्यापारी बता रहें हैं कि अफगान से भारत में मोनक्का, अंजीर, काली किशमिश और छुहाड़ा की सप्लाई होती है।

अब इन चीजों की कीमतों में तेजी आती दिख रही है। व्यापारियों का कहना है कि दिल्ली और मुंबई में बड़े व्यापारियों के पास अभी स्टॉक है लेकिन अगर यह संकट लंबा खींचता है और तालिबान-भारत के व्यापारिक रिश्ते परस्पर नहीं बनते हैं तो और उछाल आने की संभावना है।

कई व्यापारियों ने बताया कि अधिकतर आइटम अफगानिस्तान से ही आता है। ऐसे ही चांदनी चौक गल्फ बबली के एक बिजनेसमैन, सुमन कुमार गुप्ता ने बताया कि “करीब एक महीने से अफगानिस्तान के काबुल से आने वाले सामानों की आवाजाही गल्फ बबली में ठप है जिसके कारण यहां के बाजार से बादाम, किशमिश, अंजीर और किशमिश की कमी हो जाती है।

दिल्ली का सबसे बड़ा थोक बाजार यहां है, इसलिए अन्य हिस्सों में भी केवल आखिरी माल की आपूर्ति की जा रही है।” ड्राई फ्रूट रिटेलर्स एसोसिएशन जम्मू के अध्यक्ष ज्योति गुप्ता का भी कहना है कि “अफगानिस्तान से बादाम, अंजीर, पिस्ता आता है।

एक हफ्ते के अंदर ही दाम 200-250 रुपये प्रति किलो बढ़े हैं। 15-20 दिन से कोई माल नहीं आ रहा। रक्षाबंधन आ रहा है और बरसात का मौसम भी है इसलिए सूखे फलों की मांग और बढ़ गई है। अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति की वजह से सूखे फलों का आयात प्रभावित हुआ है। जम्मू में सूखे फलों के दाम बढ़ गए हैं।”

इसी तरह एक व्यक्ति ने बताया कि कुछ दिन पहले जिस दाम पर खरीदारी हुई थी आज उससे दोगुने दाम पर फल मिल रहे हैं। बाज़ार में इस तरह उछाल आने से कई चीजें आम ग्राहकों के बजट से बाहर हो जाएंगी।

ज्ञात हो कि अफगानिस्तान अपने सफेद शहतूत के लिए जाना जाता है। देश की जलवायु, विशेष रूप से अच्छी मिट्टी की नमी वाले पहाड़ी क्षेत्रों में, प्रसिद्ध बेरी के लिए एक अनुकूल उत्पादन क्षेत्र प्रदान करती है। भारत अफगानिस्तान के शीर्ष निर्यात स्थलों में से एक है।

यह सूखे किशमिश, अखरोट, बादाम, अंजीर, पाइन नट, पिस्ता, सूखे खुबानी का आयात करता रहा है। साथ ही हींग और केसर के अलावा देश से ताजे फलों का भी आयात होता है।

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