राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिल्ली यूनिवर्सिटी के अधीन आने वाले किसी भी कॉलेज में एडमिशन मिलना आज के समय मे एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसके पीछे हाई कटऑफ पर बनने वाली मेरिट लिस्ट और कॉलेजों की सीमित संख्या है।
आज इसी सिलसिले में सीएम अरविंद केजरीवाल ने कुछ अहम जानकारियां साझा की है। उन्होंने तकनीकी अड़चनों की बात भी की और इसे दूर करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया।
दिल्ली के कॉलेजों में नामांकन के लिए जारी की जाने वाली लिस्ट में हाई कटऑफ मार्क पर बोलते हुए सीएम ने कहा,’ऐसा क्यों हो रहा है कि कटऑफ इतना ज़्यादा हो रहा है, इसमें सभी सरकारों की गलती है।
ये इसलिए हो रहा है क्योंकि दिल्ली में कॉलेज, यूनिवर्सिटी की बहुत भारी कमी हो गई है। हर साल दिल्ली में करीब 2.5 लाख बच्चे बारहवीं पास करते हैं उनमें से 1.5 लाख बच्चों को दाखिला मिल पाता है।’
केजरीवाल ने नए कॉलेज खोले जाने की जरूरत भी बताई लेकिन न खोलने के पीछे के कारण बताते हुए कहा,’दिल्ली में इस समय बहुत सारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोलने की जरूरत है, दिल्ली सरकार तैयार है।
लेकिन हमारे सामने एक बहुत बड़ी कानूनी अड़चन आ रही है। 1922 में अंग्रेज़ों के बनाए ‘दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट’ के तहत दिल्ली में जो भी कॉलेज खुलेगा वो सिर्फ DU से एफिलिएट हो सकता है।’
सीएम केजरीवाल ने यह भी बताया कि इस दिशा में अड़चनों को दूर करने के प्रयास जारी हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को कानून में सुधार के लिए चिट्ठी लिखी गई है। उन्होंने कहा,’दिल्ली यूनिवर्सिटी में पिछले 30 सालों में कोई नया कॉलेज नहीं खुला है।
आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर इस कानून के सेक्शन 5(2) को डिलीट करने की मांग की है। ताकि नए कॉलेज, यूनिवर्सिटी खुल सकें।’
