मायावती का दावा- बसपा के प्रबुद्ध सम्मेलन ने उड़ाई बीजेपी की नींद

बहुजन समाज पार्टी(बसपा) प्रमुख मायावती ने सोमवार को भाजपा पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि जब से उत्तर प्रदेश में बसपा के तत्वाधान में प्रबुद्ध वर्ग के कार्यक्रम हो रहे हैं, तब से भाजपा को काफी बौखलाहट हो रही है।

बसपा के ब्राह्मण सम्मेलन का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में किए जा रहे प्रबुद्ध सम्मेलनों को जनता का खूब प्यार मिल रहा है जिससे भाजपा की नींद उड़ी हुई है।

मायावती ने इन कार्यक्रमों से भाजपा सर्कल में बौखलाहट होने का दावा किया। 15 अगस्त को भी उन्होंने एक ट्वीट कर लिखा था कि “बसपा के प्रबुद्ध वर्ग विचार संगोष्ठी की यूपी के जिलों-जिलों में अपार सफलता से बौखला कर पहले इसे रोकने का सरकारी प्रयास और अब इसे ‘जातिवादी सम्मेलन’ कहना, भाजपा की गलत सोच व समझ को ही प्रदर्शित करता है, यह अति-निन्दनीय है।”

बसपा प्रमुख का मानना है कि इस प्रबुद्ध सम्मेलन को रोकने के लिए भाजपा हर संभव कोशिश कर रही है।‌ गौरतलब है कि भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई ने रविवार को एक पोस्टर जारी कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कर्मयोगी के रूप में दिखाया था जिसमें वह बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं, और दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती को सत्ताभोगी के रूप में दिखाया गया था जिसमें मायावती के बारे में लिखा गया था “बाढ़ ग्रस्त लोगों के बजाय जातिवादी सम्मेलन में व्यस्त।”

इसपर बसपा प्रमुख ने पलटवार करते हुए कहा कि बसपा पर टिप्पणी करने की बजाय भाजपा को बाढ़ व कोरोना से परेशान जनता की मदद करनी चाहिए। मायावती ने प्रतिक्रिया देते हुए सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि बसपा के लोगों ने सबसे पहले आगे आकर अपने सामर्थ्य के हिसाब से कोरोना काल में सरकारी उपेक्षा के शिकार लोगों की काफी बढ़-चढ़कर मदद की है।

इसी प्रकार पार्टी के लोगों ने हमेशा बाढ़ पीड़ितों की भी मदद की है और अभी भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार से उत्तर प्रदेश विधानसभा का सत्र भी शुरू हो रहा है जिसमें अपनी पार्टी के विधायकों से उन्होंने यह अनुरोध किया है कि वे विधानसभा के नियमों का पालन करते हुये प्रदेश में जनहित के मुद्दों को उठाएं व केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के विरोध करें क्योंकि केन्द्र सरकार ने ये कानून किसानों की सहमति के बिना ही बनाए हैं जिसका पार्टी शुरू से ही विरोध करती रही है और केन्द्र सरकार पर इन कानूनों को वापस लेने का दबाव भी बनाएं।

मायावती ने कहा कि भले ही केन्द्र ने अब तक ये कानून वापस नहीं लिया हो लेकिन उनकी कोशिश होगी कि भाजपा सरकार इन्हें प्रदेश में लागू न कर पाए।

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