दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित होने से पहले लोकसभा में दो व राज्यसभा में एक बिल बिना चर्चा के पारित हो गए। लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने से पहले ‘भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक 2021’ और ‘अंतरदेशीय जलयान विधेयक, 2021’ बिना बहस के पारित हो गए, तो वहीं राज्यसभा में एमएसएमई की मदद के लिए ‘फैक्टरिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक’ को मंजूरी दे दी गई।
मानसून सत्र की हंगामेदार कार्यवाही के बीच लोकसभा से बिना चर्चा के 5 बिल और 2 विनियोग विधेयक(एप्रोप्रिएशन बिल) पास हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, 9 दिनों में लोकसभा लगभग 6 घंटे 35 मिनट ही चल पाई जिसमें 12% ही काम हुआ है। वहीं, राज्यसभा की बात करें तो 20 जुलाई को कोरोना महामारी पर 6 घंटे से अधिक चर्चा हुई थी।
राज्यसभा में बाकी दिन हंगामे के कारण बर्बाद हुए और सिर्फ़ 23% कामकाज हुआ। राज्यसभा में हंगामे के बीच बिना चर्चा के तीन बिल पारित हुए हैं।
लोकसभा में बिना चर्चा के जो बिल पास हुए उनमें –
राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान विधेयक, 2021
फेक्टर विनियमन संशोधन विधेयक,2021
दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक,2021
विनियोग विधेयक(एप्रोप्रिएशन बिल)(No.3),2021
विनियोग विधेयक(एप्रोप्रिएशन बिल)(No.4),2021
भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक,2021
अंतर्देशीय पोत विधेयक,2021 शामिल हैं।
वहीं दूसरी तरफ,राज्यसभा में जो बिल बिना चर्चा के पारित हुए वो हैं –
फेक्टर विनियमन संशोधन विधेयक,2021
समुद्री सहायता विधेयक,2021
किशोर न्याय (संशोधन) विधेयक ,2021
गौरतलब है कि पेगासस जासूसी मामला और तीनों कृषि कानून बिल ही विपक्ष के सबसे जोरदार मुद्दों के तौर पर नजर आ रहे हैं। जासूसी प्रकरण पर संसद में पिछले कई दिनों से चल रहे गतिरोध के बीच कांग्रेस ने गुरुवार को फैसला किया कि मानसून सत्र के दौरान आगे भी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पीछे नहीं हटेगी और चर्चा कराने एवं गृहमंत्री अमित शाह के जवाब की मांग पुरजोर ढंग से करती रहेगी। पेगासस के मुद्दे पर 14 विपक्षी दल एक साथ खड़े हैं। बार-बार जारी इस गतिरोध से दोनों सदनों के सभापति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कड़े रुख अपनाने का फैसला बता चुके हैं।
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