बिहार में सबके लिए अहम है 5 जुलाई का दिन, लालू, चिराग व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए भी तय होगा आगे का रास्ता

बीते दिनों 13 जून को लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के दोफाड़ होने के 21 दिन बाद सोमवार को पहली बार चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के बीच का विवाद सड़क पर दिखाई देगा। भले ही पशुपति कुमार पारस इससे पहले पटना में आकर अपने गुट के राज्य कार्यकारिणी की बैठक कर चुके हो, लेकिन चिराग पासवान लोजपा में उभरे विवाद के बाद पहली बार पटना आएंगे। बता दें कि चिराग ने 5 जुलाई यानी के पिता के जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद यात्रा’ निकालने की बात कही थी।

दोनों नेताओं का शक्ति प्रदर्शन स्थल पटना का एयरपोर्ट रोड होगा। एयरपोर्ट रोड पर स्थित लोजपा के प्रदेश कार्यालय में पशुपति कुमार पारस दिन के 11 बजे से कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। पार्टी के प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने बताया कि पूरे बिहार सहित अन्य राज्यों से पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के प्रशंसक व समर्थक भाग लेने आ रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरूआत उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण से होगी और इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों को पैकेट वाला खाना बांटा जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा को लेकर रविवार को बैठक भी हुई थी। चिराग पासवान के बारे में बताएं कि सोमवार को 11:30 बजे वह पटना एयरपोर्ट पर आएंगे जहां उनके भव्य स्वागत की तैयारी है। यहां से ‘आशीर्वाद यात्रा’ की शुरुआत होगी।

चिराग का काफिला सड़क मार्ग से हाजीपुर पहुंचेगा। इसके लिए कई जगह पर तोरण द्वार, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग पूरे शहर में लगाए गए हैं। वहीं 5 जुलाई को राजद अपना 25वां स्थापना दिवस मनाएगी। अपनी बीमारी को देखते हुए लालू प्रसाद दिल्ली में ही रहेंगे और इस समारोह का वर्चुअल माध्यम से संबोधन करेंगे। लंबे समय के बाद उनका यह सार्वजनिक कार्यक्रम होगा, जिस पर सबकी निगाहें बनी हुई है।

चिराग पासवान के ‘आशीर्वाद यात्रा’ के जरिए शक्ति प्रदर्शन के बाद भाजपा अपना रुख साफ करेगी। साथ ही यह भी साफ होगा कि चिराग पासवान में कितनी ज़मीनी ताकत बची हुई है। उधर चिराग के नीतीश कुमार के खिलाफ रहने पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा।

अगर वह एनडीए के साथ आते हैं तो यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे कहां तक बर्दाश्त कर सकेंगे। भाजपा के बाद चिराग पासवान भी अपना रुख साफ करेंगे कि भाजपा द्वारा साथ न मिलने पर वह अकेले खड़े होंगे या महागठबंधन के साथ जाएंगे। 

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