महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा एक समारोह में केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे समेत कुछ नेताओं को ‘पूर्व और संभावित भावी सहयोगी’ कहकर संबोधित किये जाने के बाद से बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं।

ज्ञात हो कि शिवसेना ने 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा पार्टी से रिश्ते तोड़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे एक कार्यक्रम में शामिल होने महाराष्ट्र के औरंगाबाद पहुंचे थे। समारोह में अपने संबोधन की शुरुआत में और मंच पर उपस्थित नेताओं को उन्होंने ‘मेरे पूर्व, वर्तमान और अगर हम साथ में आते हैं तो भावी सहयोगी’ कहकर संबोधित किया जिससे शिवसेना और भाजपा के साथ आने की चर्चाएं होने लगी।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के भाजपा नेता दानवे और राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री तथा कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट भी मंच पर मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने यह संबोधन पुराने सहयोगी और केंद्रीय मंत्री दानवे की ओर देखते हुए कहा। रेल राज्यमंत्री राव साहेब दानवे को उन्होंने पुराना सहयोगी बताते हुए कहा कि “कौन कब एक-दूसरे के साथ आ जाए, यह नहीं बता सकते।”

बाद में एक अन्य समारोह में संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उन्होंने पूर्व और वर्तमान सहयोगी इसलिए कहा था, क्योंकि मंच पर सभी दलों के नेता मौजूद थे। उन्होंने कहा,”अगर सब साथ आते हैं तो वे भावी सहयोगी भी बन सकते हैं। समय बताएगा।”

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि उन्हें अब और प्रदेश का ‘पूर्व’ मंत्री नहीं कहा जाना चाहिए क्योंकि चीजें बदल रही हैं। मुख्यमंत्री ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान पर हल्के अंदाज में कहा कि “तीन दलों की सरकार में से हो सकता है कि वे किसी एक दल में शामिल हो रहे हों।”

वहीं, ठाकरे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसी अन्य स्थान पर संवाददाताओं से कहा कि “ठाकरे को मान लेना चाहिए कि शिवसेना के राकांपा और कांग्रेस के साथ ‘अस्वाभाविक गठबंधन’ की वजह से राज्य को नुकसान उठाना पड़ रहा है।”

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