प्रदेश भर में संचालित हो रहे पहली से आठवीं कक्षा तक के निजी प्रारंभिक विद्यालयों पर सरकार ने नकेल कसा है। सरकार ने 31 दिसंबर तक इन विद्यालयों को अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है अथवा बिना अनुमति के अब ऐसे निजी विद्यालय संचालित नहीं हो सकेंगे।

वहीं यदि अनुमति प्राप्त किए बिना विद्यालय संचालित किए गए तो सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही पहले से अनुमति प्राप्त निजी विद्यालयों को भी अपने अभिलेख शिक्षा विभाग के ई-संबंधन पोर्टल (edu-online.bihar.gov.in) पर डीईओ के माध्यम से अपलोड कराना जरूरी है।

इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को शिक्षा विभाग की ओर से दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है। अधिनियम 2009 की धारा 18 एवं अधिनियम 2011 के नियम 11 के प्रावधानों के तहत राज्य के सभी निजी प्रारंभिक विद्यालयों को अनिवार्य रूप से सरकार की प्रस्वीकृति प्राप्त करनी जरूरी है।

प्रारंभिक निजी विद्यालयों को प्रस्वीकृति जिला स्तर पर गठित त्रिस्तरीय समिति द्वारा निर्धारित मापदंडों के तहत दी जाती है जिसके अध्यक्ष जिला शिक्षा पदाधिकारी होते हैं। ये समिति निजी स्कूलों के आवेदन पर उसका स्थल जांच कर देखती है कि बच्चों के लिए उक्त शैक्षिक संस्थान में तमाम तरह की पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं या नहीं।

विभागीय आदेश के मुताबिक निजी प्रारंभिक विद्यालयों को अनुमति के लिए शिक्षा विभाग की वेबसाइट ‘ई-संबंधनठ पोर्टल’ पर आवेदन करना होगा। नई व्यवस्था के तहत पहले से अनुमति पाए विद्यालयों को ऑनलाइन डाक्युमेंट अपलोड का काम 30 सितंबर तक पूरा करना होगा।

इसके बाद जिला स्तर पर तीन सदस्यीय समिति द्वारा निर्धारित मापदंड के तहत जांच की जाएगी और फिर अनुमति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाएगा। विभाग ने सभी जिलों से कह दिया है कि 31 दिसंबर से पूर्व सभी निजी प्रारंभिक विद्यालयों को अनुमति संबंधी क्यूआर कोड का प्रमाण पत्र निर्गत करने की कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।

साथ में यह भी निर्देश जारी किए गए हैं कि पूर्व से प्राप्त लंबित आवेदनों के संदर्भ में अनुमति संबंधी कोई ऑफलाइन कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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