पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद भड़की हिंसा को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरूवार को राज्य सरकार को झटका देते हुए सीबीआई जांच का आदेश दे दिया है। यह जांच कोर्ट की निगरानी में होगी।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अस्वाभाविक मृत्यु, हत्या और रेप सहित अन्य अधिक महत्व के अपराध के मामलों की जांच सीबीआई से कराने और अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी के गठन का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने मानवाधिकार आयोग द्वारा गठित कमेटी की सिफारिशों को लगभग मान लिया है. कोलकाता हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद जहां भाजपा पीड़ितों को इंसाफ की दिशा में पहला कदम बताकर ममता बनर्जी सरकार पर हमले बोल रही है, तो वहीं तृणमूल कांग्रेस(टीएमसी) ने इसे राज्य सरकार का अधिकार कम करने वाला बताया।
केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले के बाद ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला और कहा कि यह दिवंगत कार्यकर्ताओं के परिवारों को संदेश है कि उनके साथ न्याय होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा “कार्यकर्ताओं ने भाजपा महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुष्कर्म किया। क्या राज्य सरकार का यही अधिकार है कि वह महिलाओं का बलात्कार करे?
लोगों की हत्या करे? क्या यह बंगाल सरकार का अधिकार है कि वह भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को लूटे, जलाएं और उन्हें अपने ही देश में शरणार्थी बना दे? क्या उनकी ये गलती है कि वह भाजपा के समर्थक हैं?” पश्चिम बंगाल में ‘खेला होबे’ दिवस पर उन्होंने आगे सवाल उठाए कि “टीएमसी ने क्या ‘खेला’ किया है?
रेप, मर्डर इनका ‘खेला’ है। टीएमसी अब आधिकारिक तौर पर महिलाओं के बलात्कार का जश्न मनाएगी। ये है ममता बनर्जी की राजनीति। आरोप है कि बंगाल में 60 साल की महिला के साथ रेप हुआ, लेकिन दीदी बोल रही हैं कि ‘खेला होबे’ ” इसके साथ ही स्मृति ईरानी ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा,
“पीड़ितों को न्याय मिलेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी हर बलात्कार के बारे में जानती थीं और वह बलात्कारियों के साथ खड़ी रहीं। मंत्री ने यह भी सवाल किया कि “ममता बनर्जी असम क्यों नहीं गईं और बंगाल छोड़कर भाग गए लोगों को वापस क्यों नहीं लाईं? आपको लगता है कि जिन लोगों ने जान गंवाई और उनके सम्मान का मुआवजा दिया जा सकता है?”
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