लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलने वाला था किंतु तय अवधि से दो दिन पहले ही सदन की कार्यवाही अध्यक्ष द्वारा अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित कर दी गई।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मानसून सत्र में सदन की कार्यवाही सुचारू तरीके से नहीं चलने पर दु:ख जताया और सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद मीडिया से बात की।

उन्होंने कहा कि “निरंतर व्यवधान के कारण महज 22 प्रतिशत कार्य निष्पादन रहा। लोकसभा की कार्यवाही सुचारू तरीके से नहीं चली, इसका मुझे दुख है। 17वीं लोकसभा का 6वां सत्र आज सम्पन्न हुआ। इस सत्र में अपेक्षाओं के अनुरुप सदन का कामकाज नहीं हुआ।

इसे लेकर मेरे मन में दुख है। मेरी कोशिश रहती है कि सदन में अधिकतम कामकाज हो, विधायी कार्य हो और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो।

सदन की कार्यवाही सहमति एवं सामूहिक जिम्मेदारी के साथ चलनी चाहिए लेकिन आसन के समीप आकर सदस्यों का तख्तियां लहराना, नारे लगाना परंपराओं के अनुरूप नहीं है।”

उन्होंने बताया कि 17वीं लोकसभा की छठी बैठक 19 जुलाई 2021 को शुरू हुई और इस दौरान 17 बैठकों में 21 घंटे 14 मिनट कामकाज हुआ। बिरला ने बताया कि व्यवधान के कारण 96 घंटे में करीब 74 घंटे कामकाज नहीं हो सका। “

इस बार लगातार गतिरोध रहा। ये गतिरोध समाप्त नहीं हो पाया। पिछले 2 वर्ष संसद के कामकाज की दृष्टि से अधिक उत्पादकता वाले रहे। इसबार कुल उत्पादकता 22% रही। 20 विधेयक पारित हुए।”

लोकसभा अध्यक्ष ने सत्र के दौरान कामकाज का ब्यौरा पेश करते हुए कहा कि “सदन में प्रश्नकाल की कार्यवाही में महज 66 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिए गए। सदस्यों ने नियम 377 के अधीन 331 मामले उठाए।”

उधर राज्यसभा की कार्यवाही भी लगातार बाधित ही रही। आज राज्यसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति वेंकैया नायडू ने भावुक होते हुए कहा कि “मैं इस बात से बेहद दुखी हूं कि कुछ सदस्यों ने मानसून सेशन में बुरी तरह उपद्रव किया है।

आपकी ओर से किसी भी मसले पर बहस की जा सकती है और राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन जिस तरह से उपद्रव किया गया था, वह दुख पहुंचाने वाला है।

कृषि कानूनों का विरोध करते हुए सदस्यों द्वारा सदन की मेज पर चढ़ और बैठ जाने से राज्यसभा की सारी पवित्रता खत्म हो गई।”

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