देश मे कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में जब लॉकडाउन की वजह से अफरातफरी का माहौल बना था, मजदूरी बंद हो गई, खाने के लाले पड़ गए और मजदूरों को जब अपने घर की याद आई और उन्हें सरकार से कोई उम्मीद नही दिखी तब एक इंसान मसीहा बन कर सामने आया और उसने असंख्य मजदूरों को अपने खर्चे पर उनके घर सही सलामत पहुंचाया। यह आंकड़ा कितना था और कितने लोग छूट गए इस बात का अंदाज़ा शायद सोनू सूद को भी नही है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह आंकड़ा जरूरी नही था और उस वक़्त की जरूरत थी ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद।


हालांकि करीब 5 महीने से दिन रात मजदूरों को उनके भर पहुंचाने के साथ अन्य लोगों की मदद करने के अभियान में लगे सोनू सूद ने पहली बार आंकड़ा जारी करते हुए अब बताया है कि कितने लोग रोज उनसे मदद मांगते हैं। सोनू अपने इस शानदार अनुभव पर एक किताब भी लिख रहे हैं जो जल्दी ही सब के बीच उपलब्ध होगी।


सोनू ने ट्वीट करते हुए लिखा, “1137 मेल, 19000 फेसबुक मैसेज, 4812 इंस्टा मैसेज और 6741 ट्विटर मैसेज। ये आज के हेल्प मैसेज हैं। एवरेज आंकडे़ देखे तो करीब इतनी रिक्वेस्ट मुझे रोज मदद के लिए मिलती हैं। एक इंसान होने के तौर पर ये असंभव है कि आप इनमें हर किसी तक पहुंच पाएं।लेकिन फिर भी मैं अपनी पूरी कोशिश करता हूं।”सोनू ने अपने मैसेज के आखिरी में लिखा है कि मैं माफी चाहता हूं अगर मैंने आपका मैसेज मिस कर दिया तो।