भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने गुरुवार को खुलासा किया कि उनके Axiom-4 मिशन के दौरान जिस Falcon-9 रॉकेट से उड़ान भरनी थी, उसमें लिक्विड ऑक्सीजन का रिसाव हुआ था — और इसे समय रहते ISRO इंजीनियरों ने पकड़ा।
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, “ISRO ने सच में मदद की। मैं ISRO चेयरमैन वी. नारायणन और उनकी टीम का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मेरी जान बचाई।”
ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि SpaceX ने शुरुआत में इस रिसाव को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन ISRO की सख्त जांच की मांग पर जब रॉकेट के ऑक्सीडाइज़र लाइन की जांच हुई, तो एक दरार (क्रैक) पाई गई — जो लॉन्च के समय विस्फोट का कारण बन सकती थी।
“अगर वो दरार के साथ रॉकेट उड़ जाता, तो कंपन से वो खुल जाती और पूरा मिशन तबाही में बदल जाता। SpaceX को भी अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर है,” — वी. नारायणन ने कहा।
शुक्ला की उड़ान पहले 29 मई को तय थी, लेकिन खराब मौसम और तकनीकी दिक्कतों की वजह से 25 जून को हुई। वे अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने जो ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) पहुंचे।
ISRO की सटीकता और अनुभव ने चार अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाई — भारत की तकनीकी सतर्कता को मिली वैश्विक सराहना।
