अमेरिका की पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत निक्की हेली ने ट्रंप प्रशासन को चेताते हुए कहा है कि भारत के साथ रिश्ते टूटने की कगार पर हैं, और अगर अमेरिका चीन की बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाना चाहता है, तो भारत-अमेरिका संबंधों को पटरी पर लाना बेहद जरूरी है।
एक लेख में हेली ने लिखा कि भारत को चीन जैसा प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक मूल्यवान लोकतांत्रिक सहयोगी की तरह देखा जाना चाहिए।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर 25% आयात शुल्क लगा दिया है। इससे पहले ही भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका 25% शुल्क लगा चुका है। साथ ही, अमेरिका की भारत-पाक संघर्ष विराम में मध्यस्थता की कोशिशों को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनातनी रही।
हेली ने चेतावनी दी, “अगर अमेरिका ने भारत के साथ 25 वर्षों में बने विश्वास को तोड़ा, तो यह रणनीतिक आत्मघात होगा।”
उन्होंने लिखा कि भारत न केवल चीन का रणनीतिक संतुलन बना सकता है, बल्कि अमेरिका की आपूर्ति श्रृंखलाओं को चीन से हटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खासकर टेक्सटाइल, सस्ते मोबाइल और सोलर पैनल जैसे क्षेत्रों में भारत की उत्पादन क्षमता अहम है।
रक्षा, मध्य पूर्व, और वैश्विक जनसंख्या के लिहाज़ से भी भारत की भूमिका को उन्होंने बेहद अहम बताया। “चीन की जगह भारत का उदय दुनिया के लिए खतरा नहीं, बल्कि अवसर है,” उन्होंने कहा।
निक्की हेली ने साफ संदेश दिया- “भारत के साथ रिश्तों को संभालिए, नहीं तो चीन की ताकत को रोकना नामुमकिन हो जाएगा।”
